मेरठ। ‘पहले आओ पहले पाओ’ के विज्ञापन के जरिये ठगी की ‘ट्रिपल सेंचुरी’ लगाने वाले गैंग का खुलासा हुआ है। घर बैठे इंटरनेट के जरिए हजारों रुपये कमाने का लालच देकर यह गैंग तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी कर चुका है। पीड़ितों की शिकायत पर आईजी जोन ने गैंग के सरगना और तीन युवतियों को गिरफ्तार किया है। इनसे दो लाख रुपये, होंडा सिटी कार, आठ मोबाइल और प्रेस का फर्जी कार्ड बरामद हुआ है।
बेगमबाग निवासी इंटरमीडिएट के छात्र हर्षित सिंघल और फरुखाबाद निवासी सुशीला गुप्ता ने आईजी जोन आलोक शर्मा से शिकायत करते हुए बताया था कि उन्होंने एक विज्ञापन पढ़ा था। ‘पहले आओ पहले पाओ’ शीर्षक के नाम से इस विज्ञापन में कहा गया था कि पार्ट टाइम जॉब के बहाने इंटरनेट के जरिए घर बैठे 20 से 30 हजार रुपये कमाए जा सकते हैं। यह भी प्रलोभन दिया जाता था कि कंपनी की तरफ से सस्ते दामों पर मोबाइल और लैपटॉप दिया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करने की बात लिखी गई थी। हर्षित ने छह सितंबर को इस नंबर पर कॉल की। कॉल रिसीव करने वाली युवती ने हर्षित को एक एकाउंट नंबर बताते हुए रजिस्ट्रेशन के नाम पर एक हजार रुपये जमा कराने को कहा। हर्षित ने फीस जमा कर लैपटॉप खरीदने के लिए अप्लाई किया। लैपटॉप न मिला तो छात्र ने दोबारा उसी नंबर पर संपर्क किया। युवती ने फिर पांच हजार रुपये जमा कराए। युवती ने हर्षित से 40 हजार रुपये जमा करा लिए। ठगी का अहसास होने पर हर्षित और सुशीला ने आईजी से शिकायत की।
आईजी ने थाना लालकुर्ती और इंचौली में रिपोर्ट दर्ज करवाते हुए इस रैकेट का खुलासा करने को स्पेशल टीम लगा दी। टीम ने इस रैकेट में काम करने वाली प्रियंका पुत्री अशोक जोशी निवासी बसंत विहार, जेल चुंगी सिविल लाइन, प्रिया उर्फ सोनी पुत्री कृष्ण कुमार और मोनिका पुत्री मदन लाल निवासी अनूपनगर फाजलपुर कंकरखेड़ा को गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद इस गैंग को लीड करने वाला सौरभ शर्मा उर्फ विशाल भारद्वाज पुत्र राम अवतार शर्मा निवासी न्यू किशनपुरा बागपत रोड टीपीनगर भी हत्थे चढ़ गया।
सैकड़ों को लूट चुका गैंग
यह गैंग ज्यादातर गृहणियों और नवयुवकों को निशाना बनाता था। मुख्य आरोपी सौरभ अभी तक तीन सौ से ज्यादा लोगों को ठगने की बात कबूल कर चुका है। ठगी की रकम करोड़ों में बैठती है। आईजी ने अपील की है कि जो लोग इस ठगी का शिकार हुए हैं, वे आगे आकर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराएं। इन आरोपियों के बैंक खातों की जांच कराते हुए उसे सीज कराया जा रहा है।
हर्षित ने पकड़वाईं युवतियां
ठगी होने पर हर्षित ने घर बैठने के बजाए गैंग की तह तक जाने का निर्णय लिया था। हर्षित के नंबर को कंपनी में काम करने वाली युवती ने रिसीव करना बंद कर दिया था। हर्षित ने दूसरे नंबर से कंपनी की दूसरी युवती से संपर्क किया। हर्षित ने इस बार पैसे नगद देने की बात कही। रजिस्ट्रेशन फीस और लैपटॉप की कीमत का कैश लेने के लिए उसने युवती को चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के सामने बुलाया। उसने पुलिस को पहले ही पूरी जानकारी दे दी थी। कैश लेने के लिए जब तीनों युवतियां होंडा सिटी से वहां पहुंची तो पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।
बॉस की खोली पोल
महिला थाने में हुई पूछताछ में युवतियों ने सारा ठीकरा विशाल के सिर पर फोड़ दिया। उन्होंने बताया कि विशाल उनका बॉस है, जिसने उन्हें प्रतिमाह दस हजार रुपये वेतन पर रखा हुआ है। उन्हें मोबाइल फोन और कार की सुविधा भी मुहैया कराता है। बताया कि विशाल ने इंटरनेट के जरिये एक कंपनी से संपर्क किया हुआ है। छोटे सामान देकर लोगों को जाल में फंसाता है और उसके बाद मोटी रकम वसूलता है। इस गिरोह में आठ युवतियां और पांच युवक भी जुड़े हैं।