मेरठ। नगर निगम के अस्पतालों में दवा खरीद के नाम पर बंदरबांट मची हुई है। आयुर्वेदिक अस्पताल ने तीन साल से दवा ही नहीं खरीदी है। जबकि होम्योपैथी अस्पताल ने तीन साल में महज 33 हजार रुपये की दवा खरीदी है। सूरजकुंड अस्पताल और कोतवाली अस्पताल से तो दवा खरीद का रिकार्ड ही नहीं उपलब्ध कराया गया। जबकि नगर निगम हर साल करीब छह लाख रुपये का बजट दवा खरीद के लिए ही पास करता है।
सूरजकुंड पर संक्रामक अस्पताल, कोतवाली पर निगम डिस्पेंसरी, साकेत गोल मार्केट में होम्योपैथी अस्पताल और ब्रह्मपुरी में आयुर्वेदिक अस्पताल है। इनके रखरखाव, दवाइयों और वेतन आदि की जिम्मेदारी नगर निगम की है। एक महीने पहले अमर उजाला ने नगर निगम के अस्पतालों का निरीक्षण किया था। होम्योपैथी अस्पताल और सूरजकुंड अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं थे। दवाइयों की भी स्थिति सही नहीं थी। मामला उजागर होने पर महापौर हरिकांत अहलूवालिया और नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजवीर सिंह ने अस्पतालों का निरीक्षण करके स्थिति का जायजा लिया था। दोनों अधिकारियों ने भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए डीएम से जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद ही डीएम ने जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी चंद्र केश को जांच सौंपी थी। जांच अधिकारी के निरीक्षण में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक अस्पतालों में दवा खरीद का रिकार्ड मिला है। आयुर्वेदिक अस्पताल ने तीन साल से दवा ही नहीं खरीदी। होम्योपैथी अस्पताल ने बजट से बहुत कम दवा खरीदी। कई बार स्वास्थ्य विभाग को रिमाइंडर देने के बाद भी दो अस्पतालों ने रिकार्ड ही नहीं उपलब्ध कराया।