मेरठ। गैंगरेप और धर्मांतरण मामले में मुख्य आरोपी सनाउल्ला ने पुलिस अफसरों को एक साल की कहानी तीन घंटे में सुना दी। पुलिस के मुताबिक सनाउल्ला ने बताया कि मदरसे में बच्चों को पढ़ाने के दौरान ही युवती के धर्मांतरण की पूरी प्लानिंग बना ली थी। गांव में जब यह चर्चा फैली तो आठ माह नौकरी करने के बाद युवती ने खुद ही मदरसे में पढ़ाना छोड़ दिया। इसके बाद भी आरोपी युवती को मदरसे में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसे देते रहे। युवती का जबरन धर्मांतरण कराने के लिए सनाउल्ला और नवाब उसे हापुड़, मुजफ्फरनगर वे सहारनपुर ले गए। युवती ने मुजफ्फरनगर के मदरसे में रहने से इनकार किया तो उसे बंधक बनाकर रखा गया। मौका देखकर युवती वहां से भाग आई। युवती को जबरन धर्मांतरण कराने में नामजद आरोपियों के अलावा भी अन्य कई लोग शामिल हैं, जिनके नाम सनाउल्ला ने पुलिस को बताए। सवाल उठता है कि पुलिस ने आरोपी की बताई किसी भी जगह पर दबिश नहीं दी। पुलिस ने बताया कि सनाउल्ला को मंगलवार शाम ही गिरफ्तार कर लिया गया था। रात में तीन घंटे एसएसपी, एसपी देहात, सीओ किठौर, क्राइम ब्रांच टीम ने आरोपी से पूछताछ की। पुलिस के सामने आरोपी ने कबूल किया कि धर्मांतरण कराने के लिए उन्होंने नौकरी का झांसा दिया था।
कमजोर विवेचना, आरोपियों का फायदाः
चर्चित शास्त्रीनगर गैंगरेप प्रकरण में पुलिस की कमजोर विवेचना के चलते आरोपियों को जमानत मिल गई। वारदात के बाद पुलिस विवेचना में लापरवाही करते हुए केस को कमजोर बनाकर आरोपियों को फायदा पहुंचा देती है। खरखौदा कांड में पुलिस शुरू से ही पीड़िता के विपरीत चल रही है। इसका फायदा आरोपियों को कोर्ट में मिल सकता है। आखिर दुष्कर्म जैसे संगीन मामलों में पुलिस आरोपियों पर मेहरबान क्यों होती है? शुरू से ही पुलिस अधिकारी अलग-अलग बयान देकर आरोपियों को बचाने में लगे हैं।