मेरठ। एक मदरसे की प्रबंधक ने मान्यता की शर्तों का ताक पर रखते हुए अपने पति को प्रधानाचार्य बना दिया और बेटे को अध्यापक। यह खुलासा जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा किए गए सत्यापन में हुआ है। सत्यापन में जिले के छह आधुनिक समेत नौ मदरसों में इस तरह की कारगुजारी पकड़ी गई है। इसके बाद विभाग ने इन सभी की मान्यता समाप्त कर दी है। अब धोखाधड़ी करने वालों पर मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी है।
विभाग ने जिले के सभी तहतानिया (कक्षा-5) और फौकानिया (कक्षा-8) तक के मदरसों में सत्यापन किया। इसमें भारी फर्जीवाड़ा मिला। कई मदरसों ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (डीएमओ) के फर्जी साइन कर छात्रों की सूची बैंक को भेज दी थी। बोर्ड मदरसे का मिला और संचालित हो रहा था स्कूल। एक मदरसे में अध्यापक कोई और था और बैंक खाते में फोटो किसी और की। गौरतलब है कि, अमर उजाला ने मदरसों की कारगुजारियों का पहले ही भंडाफोड़ कर दिया था। इसके बाद ही विभाग हरकत में आया है। इस समय जिले में 249 मदरसे संचालित हैं, जिनमें से 72 आधुनिक हैं। गड़बड़ी करने वाले 32 मदरसों की मान्यता अब तक समाप्त कर चुकी है।
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इनकी मान्यता समाप्त
मदरसा कारण
1. अलमकत बातुल इकरा, शास्त्रीनगर -एक ही परिसर में स्कूल और मदरसा।
2. रहीम उल उलूम, जाकिर कॉलोनी -स्कूल पर ही मदरसे का फर्जी बोर्ड लगाया।
3. एमएएमएस, गांव आड, -डीएमओ के फर्जी साइन कर बैंक को भेज दी सूची।
4. दीन-ए-तालीम, मोमीन नगर -अध्यापक कोई और बैंक खाते में फोटो दूसरे का।
5. हजरत मोहम्मद साहब, जिसौरी -डीएमओ के फर्जी साइन कर बैंक को भेजी सूची।
6. मोहसीना इस्लामिक, जाकिर कॉलोनी -पत्नी प्रबंधक, पति प्रधानाचार्य और बेटा शिक्षक।
7. उर्दू मीडियम मकतब, सरावा -भवन विहीन। शिक्षकों नियुक्ति भी मानकों के विपरीत।
8. एमएएमएस, जिसौरी -डीएमओ के फर्जी साइन कर बैंक को भेज दी सूची।
9. अल जामिया, अल तैयबा लिलबनात, अजराड़ा -डीएमओ के फर्जी साइन कर बैंक को भेजी सूची।
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खरखौदा क्षेत्र में भी की गई जांचः
खरखौदा क्षेत्र की युवती से गैंगरेप और धर्मांतरण का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। इसे देखते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने इस क्षेत्र के मदरसों की भी जांच की। इसमें पाया गया कि पीड़ित युवती जिस मदरसे में पढ़ाती थी, उसकी मान्यता हापुड़ जिला बनने से पहले ही गाजियाबाद से ली गई थी। इसी गांव में दूसरे मदरसे की जांच हुई तो पाया गया कि इसके पास न भवन है और न ही मानकों के अनुरूप नियुक्तियां की गई हैं। ऐसे में इसकी मान्यता समाप्त कर दी गई।
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वर्जन
धोखाधड़ी करने वाले नौ मदरसों की मान्यता समाप्त कर दी गई है। इनमें से कागजी अाधार पर बड़ी गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा। -एसएन पांडे, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी