मेरठ। युवती से गैंगरेप और धर्मांतरण मामले के मास्टर माइंड और पांच हजार के इनामी सनाउल्ला को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। बकाैल एसएसपी, सनाउल्ला 28 जून से एक जुलाई के बीच नई दिल्ली स्थित लोकनायक अस्पताल में भर्ती था। ऐसे में उसके खिलाफ 29 जून को युवती का अपहरण कर दुष्कर्म करने के साक्ष्य नहीं मिले हैं। हालांकि, सनाउल्ला को युवती के धर्मांतरण का फर्जी शपथपत्र बनवाने और उसे बिना उसके परिजनों की अनुमति के हापुड़ और मुजफ्फरनगर ले जाने का आरोपी माना गया है।
खरखौदा क्षेत्र की युवती ने तीन अगस्त को थाना खरखौदा थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया था कि 23 जुलाई को उसका अपहरण कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। बाद में युवती द्वारा आरोप लगाया कि उसके साथ 29 जून को हापुड़ स्थित मदरसे में ले जाकर गैंगरेप किया गया। उसके धर्मांतरण संबंधी झूठा शपथपत्र भी बनवाया गया। इसके साथ ही युवती का कहना था कि 29 जुलाई को उसका फिर अपहरण कर उसे मुजफ्फरनगर के एक मदरसे में रखा गया। जहां उसे जान से मारने की पूरी योजना थी। तीन अगस्त को वह किसी तरह वहां से छूटकर मेरठ पहुंची। जहां से परिजन उसे खरखौदा ले गए।
एसएसपी ने बुधवार को पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि गिरफ्तार आरोपी सनाउल्ला पुत्र बकाउल्ला युवती के ही गांव का है। पूछताछ में उसने बताया कि हार्ट पेशेंट होने के चलते वह 28 जून को नई दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में इमरजेंसी में भर्ती हुआ था। उस समय उसके साथ उसका भाई रजाउल्ला भी था। एसएसपी ने मीडिया के समक्ष लोकनायक अस्पताल के कागजात और ईसीजी की पर्ची पेश करते हुए बताया कि उसका इलाज डाॅ. एचएस हीरा की देखरेख में हुआ। सनाउल्ला इस अस्पताल से एक जुलाई को डिस्चार्ज हुआ।
एसएसपी ने दावा किया कि इससे पूर्व युवती ने आरोप लगाया कि 23 जुलाई को भी उसका अपहरण किया गया था। जबकि 23 जुलाई को वह मेडिकल कॉलेज मेरठ में प्रेग्नेंसी का ऑपरेशन कराने के लिए भर्ती हुई थी। वहां से वह 27 जुलाई को डिस्चार्ज हुई थी। इसके विपरीत एसएसपी ने बताया कि युवती जब मेडिकल अस्पताल से डिस्चार्ज होकर अपने घर पहुंची तो उसे परिजनों ने डांट-फटकार कर निकाल दिया था।
29 जुलाई को युवती सनाउल्ला के घर गई थी, जहां वह एक रात रुकी थी। वहां से उसे सनाउल्ला गढ़ स्थित दौताई लेकर गया था। जहां सनाउल्ला की देखरेख में ही युवती के धर्मांतरण संबंधी फर्जी शपथपत्र बनाया गया। इसके बाद सनाउल्ला ही युवती को मुजफ्फरनगर के एक मदरसे में लेकर गया था। इसका आधार बताया गया कि युवती को एक आवासीय मदरसे में अच्छे वेतन पर नौकरी की दरकार है। मदरसे के संचालक ने मदरसे में फिलहाल 20 महिला अध्यापिका होने के चलते नौकरी देने से मना कर दिया था। युवती मुस्तफा कॉलोनी मुजफ्फरनगर में सनाउल्ला के परिचित इकराम के यहां रुकी थी। वहां से तीन अगस्त को मेरठ लौट आई थी।