मेरठ। स्टेडियम के स्पोर्ट्स हॉस्टल में तीन साल तक क्रिकेट का ककहरा सीखने वाले खिलाड़ी ट्रायल की पिच पर पहले ही दौर में ‘बोल्ड’ हो जाते हैं। स्टेडियम में क्रिकेट के गिरते ग्राफ से खिलाड़ियों के भविष्य भी अंधकार में जा रहा है। वहीं स्टेडियम कोच ने एसोसिएशन पर चयन न कराने का आरोप लगाया है, जबकि एसो. ने स्टेडियम में दिए जाने वाले प्रशिक्षण पर ही सवाल उठाए हैं।
कैलाश प्रकाश स्टेडियम के क्रिकेट हॉस्टल के रिजल्ट पर गौर करें तो नतीजा सिफर है। 25 खिलाड़ियों के हॉस्टल में से बीते सालों में एक भी खिलाड़ी अपनी उपस्थिति रणजी टीम में नहीं दर्ज करा सका, जबकि मेरठ की अन्य क्रिकेट एकेडमी के खिलाड़ी रणजी टीम में दम दिखा रहे हैं। वर्तमान में भी मेरठ कैंट हो या फिर मेरठ कॉलेज क्रिकेट एकेडमी या करन क्रिकेट एकेडमी। इनके खिलाड़ी प्रदर्शन के दम पर ट्रायल की कसौटी पर खरा उतरकर टीम में अपनी जगह बना रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि स्टेडियम में तीन साल तक मेहनत करने वाले खिलाड़ी क्यों ट्रायल की कसौटी में बोल्ड हो जाते हैं।
स्टेडियम के कई खिलाड़ी हैं, जिनका प्रदर्शन शानदार है, लेकिन ट्रायल में एसोसिएशन का दबदबा होने के कारण उनका चयन नहीं हो पाता। खिलाड़ियों के लिए मैच आयोजित करना एसो. का काम है, लेकिन ऐसा नहीं किया जाता। चयनकर्ताओं की एकेडमी है और वहीं के खिलाड़ियों के चयन को प्राथमिकता दी जाती है। - नवीन त्यागी, क्रिकेट कोच, कैलाश प्रकाश स्टेडियम
एसो. में चयनकर्ता प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से हैं और कोई भी किसी एकेडमी से जुड़ा नहीं है। चयन प्रक्रिया में खिलाड़ी से पक्षपात नहीं होता। अगर, स्टेडियम कोच को लगता है उनके खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर है तो एसोसिएशन के सामने लाएं और साबित करें। - युद्घवीर सिंह, सचिव, मेरठ जिला क्रिकेट एसोसिएशन
अगर कोई बेहतर खिलाड़ी है तो उसे आगे बढ़ने से चयनकर्ता कभी नहीं रोक सकता, लेकिन स्टेडियम कोच को सोचना होगा कि क्या उन्होंने ऐसा एक भी खिलाड़ी तैयार किया है।
- सुरेंद्र चौहान, जूनियर टीम चयनकर्ता, यूपीसीए