मेरठ। होटल और रेस्टोंरेट संचालकों की टैक्स को लेकर एक सप्ताह से चल रही मशक्कत बृहस्पतिवार को रंग लाई। गढ़ रोड स्थित होटल हारमनी इन में हुई बैठक में असिसटेंट कमिश्नर सर्विस टैक्स ने होटल संचालकों की दलील सुनकर माना कि सर्विस टैक्स विभाग में पंजीकरण और टैक्स वसूली से व्यापारियों का शोषण हो रहा है।
बैठक में मेरठ होटेलियर्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुबोध गुप्ता और महामंत्री विपुल सिंघल ने कहा कि होटल और रेस्टोरेंट में जो भी खाना दिया जाता है। उसके बिल में 40 प्रतिशत को ही सर्विस मानकर टैक्स लगाया जाता है। शेष 60 फीसदी को माल बिक्री माना जाता है। वहीं सर्विस टैक्स विभाग पूरे बिल को ही टर्नओवर मानकर पंजीकरण और टैक्स वसूली करता है। यह गलत है। विपुल सिंघल ने कहा कि 10 लाख से ऊपर की बिक्री पर विभाग में रजिस्ट्रेशन और टैक्स रिटर्न होता है। ऐसे में जब व्यापारी का टर्नओवर 22.5 लाख हो तो उसका रजिस्ट्रेशन किया जाए और जब टर्नओवर 25 लाख हो तो उससे टैक्स वसूली की जाए। व्यापारियों की दलील को असिसटेंट कमिश्नर विमल कुमार ने सही माना। उन्होंने कहा कि आगे से ऐसा ही होगा।
इसके अलावा यदि कोई होटल अपने यहां पार्टी करता है तो उस पर अब तक 60 फीसदी सर्विस टैक्स माना जाता था। व्यापारियों ने मांग रखी कि यह 40 फीसदी होना चाहिए। असिसटेंट कमिश्नर से इस मांग को भी मान लिया। वहीं वाणिज्य कर विभाग द्वारा बिल में शामिल सर्विस टैक्स पर भी टैक्स वसूली पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
होटल मालिकों की इस मांग पर बैठक में मौजूद संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष अरुण वशिष्ठ और महामंत्री नवीन गुप्ता ने आश्वासन दिया कि उनकी इस मांग को वह वाणिज्य कर विभाग के असिसटेंट कमिश्नर के समक्ष पुरजोर तरीके से उठाएंगे। बैठक में विपुल केला, राजीव खन्ना, राजेंद्र, मुकेश कंसल, कुलदीप ठाकुर, ऋषि अग्रवाल, गगन गोयल, विनोद अरोरा, विपिन अग्रवाल, अरविंद गुप्ता व आकाश गुप्ता आदि मौजूद रहे।