मेरठ। शहर में मानकों की परवाह किए बिना घनी आबादी में चलाए जा रहे रसोई गैस गोदाम और पेट्रोल पंप स्थानांतरित करने की कवायद शुरू हो गई है। नगर निगम की पहल के बाद जिलापूर्ति अधिकारी ने सभी गैस गोदाम संचालकों को शहर से बाहर गोदाम ले जाने के लिए नोटिस जारी किया है।
कुछ वर्ष पूर्व मेरठ में हौलनाक विक्टोरिया हादसा हुआ था। आयोजन के दौरान बरती गई लापरवाही ने बड़ी तादाद में लोगों की जान ले ली थी। लेकिन वर्षों बाद भी पूरी घटना से कोई सबक नहीं सीखा गया है। शहर में घनी आबादी के बीच पेट्रोल पंप और गैस गोदाम संचालित किए जा रहे हैं। शंकर आश्रम रोड स्थित यशलोक हॉस्पिटल से चंद कदमों की दूरी पर रामानुज दयाल बाल वैश्य अनाथालय है। लेकिन हालात को देखकर कोई भी चौंक सकता है। इसके ठीक सामने विजयंत और पासी गैस सर्विस के गैस गोदाम बने हैं। समीप में ही एक पेट्रोल पंप भी बना है। अब नगर निगम ने इस दिशा में पहल की है। नगर आयुक्त राजकुमार सचान ने बताया कि मौजूदा स्थिति में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। एडीएम सिटी को जमीनी हालात से अवगत कराया गया है। जबकि जिला पूर्ति अधिकारी को पत्र लिखकर दोनों गैस गोदामों को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए कहा गया है। उधर, जिलापूर्ति अधिकारी डीएन श्रीवास्तव का कहना है कि घनी आबादी के अंदर चल रहे सभी गैस गोदामों को शहर से बाहर करने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। आदेश का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।