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‘हुसैन जिंदाबाद’ से गूंजा फलक

Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
Meerut
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मेरठ। करबला के शहीदों की याद में अजादारी की मजलिसों का दौर जारी है। पांच मोहर्रम मंगलवार शाम को कदीमी जुलूस-ए-जुलजुनाह इमाम बारगाह मोहम्मद अली खां बुढ़ाना गेट से बरामद हुआ। इसमें झूला हजरत अली असगर, अलम-ए-मुबारक शामिल थे।
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जैदी फार्म की अंजुमन फौजे हुसैनी के जावेद रजा, अयाज हुसैन और अब्दुल्लापुर की अंजुमन अब्बासिया के जामिन हुसैन, खुर्शीद आदि ने नौहेख्वानी की व करबला के शहीदों को याद किया। खैरनगर पहुंचने पर जुलूस में शहर की अंजुमनें शामिल हुईं। अंजुमन इमामिया के वाजिद अली, सफदर अली, दस्ताए हुसैनी के हुमायूं अब्बास ताबिश, इरफान हुसैन ने रौंगटे खड़े कर देेने वाले नौहे पढ़े। अंजुमन तंजीम-ए-अब्बास के अतीकुल हसनैन ने हुसैन जिंदाबाद, हुसैन जिंदाबाद के नौहे पढ़े, जिसे सुनकर पूरा माहौल गमगीन हो गया। दानिश मेरठी, दारैन जैदी ने भी नौहेख्वानी की। पुलिस चौकी बुढ़ाना गेट के आगे से होकर जुलूस खैरनगर बाजार, पान दरिबा से होते हुए रात में छोटी करबला चौड़ा कुआं पहुंचा। यहां इमामबाड़ा मनसबिया से अख्तर मस्जिद बनबटान, खैरनगर चौराहे से गुजरता हुआ देर रात वापस इमामबाड़ा मोहम्मद अली खां पहुंचा। पूरे रास्ते सुरक्षा-व्यवस्था चौकस रही। जुलूस के प्रबंधक इकबाल हुसैन कोटला रहे। इस दौरान मासूम असगर, अलहाज शाह अब्बास, अली हैदर रिजवी, जिल्ले हसनैन, तालिब जैदी, जिया जैदी, बाकर रजा, शुएब जाफरी समेत हजारों सोगवार मौजूद रहे।
उधर इमामबाड़ा वक्फ मनसबिया में मौलाना इंतेजाम हैदर लखनवी ने दोपहर में हुई मजलिस में करबला के शहीदों की कुरबानी बयां की। मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट अंसार हुसैन रिजवी ने बताया कि बुधवार शाम को जुलूस-ए-जुलजुनाह इमामबाड़ा सैयद तकी हुसैन बाजार पेड़ामल से शुरू होगा।
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अब्दुल्लापुर
मोहर्रम के पांचवें दिन अब्दुल्लापुर में मजलिसों का दौर जारी रहा। पहली मजलिस गढ़ी और दूसरी हाजिरी रंगमहल में हसन मियां की ओर से हुई। इमामबाड़ा कोट में हुई मजलिस में मौलाना अम्मार हैदर ने करबला का वाकया बयान किया। अजाखाना पक्की बैठक से जुलजुनाह हजरत अली अकबर बरामद हुआ। कल्बे अब्बास और मोहम्मद नफीस ने मर्सियाख्वानी की। नायब अली ने बताया कि बुधवार को जुलजुनाह, हजरत कासिम कोठी हसन इमाम से शुरू होगा।
जैदी फार्म
शाहिद हुसैन के अजाखाने से अलम-ए-मुबारक का जुलूस बरामद होकर दरबारे हुसैनी पहुंचा। अंजुमन के सोगवारों ने नौहेख्वानी की। इमाम बारगाह पंजेतनी में मौलाना अम्मार हैदर और दरबारे हुसैनी में मौलाना शहवार काज़मी ने करबला का वाकया बयान किया।
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