मेरठ। मोहर्रम के चौथे दिन सोमवार को शहर क्षेत्र की सभी इमाम बारगाहों और अजाखानों में करबला के शहीदों की याद में मजलिसें हुईं।
रात आठ बजे हुसैनाबाद पूर्वा फैयाज अली स्थित अलहाज डा. सैयद इकबाल हुसैन मरहूम के अजाखाने से अलम-ए-मुबारक, हजरत अब्बास का बड़ा जुलूस बरामद हुआ। इससे पहले मजलिस में मौलाना जामिन रिजवी लखनवी ने हजरत अब्बास की शहादत बयान की, जिसे सुनकर सोगवार रो पड़े। मजहर अब्बास आब्दी ने सोजख्वानी की। इस कदीमी जुलूस के प्रबंधक मोहर्रम कमेटी के संयोजक अलहाज शाह अब्बास सफवी रहे। अलम-ए-मुबारक रूस की राजधानी मॉस्को से आए सैयद मीसम अब्बास ने उठाया। अंजुमन इमामिया के वाजिद अली गप्पू, सफदर अली, औन मोहम्मद, दस्ता-ए-हुसैनी के हुमायूं अब्बास ताबिश, इरफान हुसैन, वसीम, दिलदार ने रौंगटे खड़े कर देने वाले नौहे पढ़े। अंजुमन फौजे हुसैनी के जावेद रजा, अयाज हुसैन ने नौहों से करबला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश किया। मातमी दस्तों के सोगवारों ने पुरजोर मातम किया। जुलूस नगर निगम कार्यालय के सामने, घंटाघर से गुजरता हुआ छोटी करबला चौड़ा कुआं पहुंचा। सैयद जाफर अब्बास, रजा अब्बास, इमदाद अली, खुर्रम अब्बास, कौसर रजा, अली हैदर रिजवी सहित हजारों हुसैनी सोगवार जुलूस में शामिल रहे। मंगलवार को जुलूस-ए-जुलजुनाह दोपहर तीन बजे इमामबाड़ा मोहम्मद अली खान बुढ़ाना गेट से शुरू होगा।
जैदी फार्म में भी जुलूस
जैदी फार्म स्थित अफजाल मेहंदी के अजाखाने से दोपहर को जुलूस-ए-अलम बरामद होकर इमाम बारगाह इश्तियाक हुसैन पहुंचा। बड़ी संख्या में सोगवारों ने इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद किया।
अब्दुल्लापुर
अब्दुल्लापुर में सुबह से ही मजलिसों का दौर जारी रहा। हाजिरी अजाखाना रंगमहल में अली बहादुर की ओर से मजलिस हुई। कोठी हसन इमाम मेें तसद्दुक हुसैन ने मजलिस का आयोजन किया। पक्की बैठक में हुई मजलिस के बाद मरहूम जफर अहमद के अजाखाने में भी मजलिस हुई। इसके बाद जियारते ताबूत बरामद हुआ, जिसमें सोगवारों ने मातमपुर्सी की। नायब अली ने कहा कि मजलिसों और जुलूसों में सोगवारों की भीड़ इस बात का सबूत है कि इमाम हुसैन ने हक की बात के लिए अपनी शहादत तो पेश की, मगर अपने नाना के दीन पर आंच नहीं आने दी।
चाय का इंतजाम
नगर निगम के सामने मस्जिद के बाहर सोगवारों के लिए चाय की व्यवस्था की गई। रोशन जैदी, जमील रजा एडवोकेट, डा. सरदार हुसैन, फजले हसनैन का सहयोग रहा।