फर्जी मदरसे के नाम पर शासन से हड़पे 58 लाख रुपये
सहारनपुर। मंडलायुक्त के निर्देश पर कराई गई जांच में फर्जी मदरसे के नाम पर छात्रवृत्ति और हॉस्टल खर्च के लिए शासन से मिलने वाली धनराशि को हड़पने का मामला सामने आया है। इसकी जांच करने पहुंचे अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को मौके पर मदरसा चलता नहीं मिला। मदरसा संचालक ने भी 2012 में ही मदरसा बंद करने की बात कही। इसके बाद भी मदरसे के नाम पर 58 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी गई। मामला पकड़ में आने के बाद इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। साथ ही धनराशि की वसूली और रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। बेहट क्षेत्र के बादशाही बाग में कादरिया उल उलेमा एंग्लो मदरसा संचालित होना दिखाया गया था, जिसमें बच्चों का दाखिला और हॉस्टल होना भी बताया गया था। मंडलायुक्त के निर्देशानुसार मदरसे की जांच की गई। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने मौके पर जाकर देखा तो कोई मदरसा संचालित होता हुआ नहीं मिला, जिस व्यक्ति के नाम यह मदरसा संचालित हो रहा था, उसने उच्चाधिकारियों को शपथ पत्र देकर बताया कि उसने वर्ष 2012 में मदरसा बंद कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी कागजों में मदरसा संचालित होता रहा। जिला अल्पसंख्यक विभाग के तत्कालीन अधिकारी और कर्मचारी उस व्यक्ति का शपथ पत्र भी दबाए बैठे रहे और मिलीभगत से कागजों में मदरसा संचालित होता रहा। वर्ष 2016 और 2017 में 58 लाख रुपये की बंदरबांट हुई। यह लोग कौन हैं, इसकी जांच विभाग कर रहा है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 2012 के बाद इस मदरसे की जांच की गई थी, तब तत्कालीन जांच अधिकारी ने मदरसे को क्लीनचिट दे दी थी। उसके बाद से फर्जीवाड़ा जारी रहा। अब दोबारा जांच करने पर मौके पर मदरसा नहीं मिला। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने बताया कि इस मामले में विभागीय कर्मचारी और अधिकारी भी शक के दायरे में है। इसकी पड़ताल की जा रही है। विभाग की ओर से आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी और 58 लाख रुपये की वसूली भी की जाएगी। पूरे मामले से वह शासन और मंडलायुक्त को अवगत करा चुके हैं।
किन-किन खातों में गया पैसा
सहारनपुर। छात्रवृत्ति के नाम पर मोटी रकम हड़प गई है। छात्रों के नाम पर जिन-जिन खातों पैसा गया है, उन खातों को जिला अल्पसंख्यक विभाग ने खंगालना शुरू कर दिया गया है। जब मदरसा ही नहीं था और छात्र कहां से आ गए। बताया जा रहा है कि इस मामले में चार लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, जिन्होंने यह घोटाला किया है। इसके अलावा कई विभागीय कर्मचारी और अधिकारी भी फंस रहे हैं। विभाग की ओर से जांच चल रही है। इसलिए इन लोगों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं। विभाग एक-एक खाते की गहनता से पड़ताल कर रहा है।
पहले हुई जांच किया था गुमराह
सहारनपुर। अधिकारियों के मुताबिक 2012 में इस मामले की जांच की गई थी, लेकिन तब शासन को गुमराह किया गया था। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि मौके पर मदरसा है। रमजान की छुट्टी के चलते मदरसे में छात्र नहीं मिले हैं। विभागीय अधिकारी बदले जाने के बाद पुन: जांच में पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया है। इस मामले कई विभागीय कर्मचारियों की गर्दन फंस रही है।
पहले भी कई बार हो चुका फर्जीवाड़ा
सहारनपुर। प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद मदरसों का ऑनलाइन पंजीकरण कराया गया था। सहारनपुर में पंजीकृत 400 मदरसे हैं। 2017 में मदरसों का ऑनलाइन पंजीकरण हुआ था। तब, 18 मदरसे कागजों में चलते मिले थे, जिनकी तत्काल प्रभाव से मान्यता रद्द कर दी गई थी, लेकिन उन मदरसों को संचालित करने वाले लोगों से आज सरकार से प्राप्त की गई धनराशि की रिकवरी नहीं हुई है। यह मामला सुर्खियां रहा था, लेकिन उसके बाद जांच की फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अब विभाग की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही आरोपियों रिकवरी की जाएगी। वह शासन को रिपोर्ट भेज चुके हैं।