मिट्टी की ढांग में दबकर मजदूर की मौत
मेरठ। मेडिकल थाना क्षेत्र में खुदाई के दौरान मिट्टी की ढांग में दबकर मजदूर की मौत हो गई। सूचना पर पजिरन मौके पर पहुंचे और हंगामा कर दिया। सूचना पाकर पुलिस भी आ गई। काफी देर चली गहमा-गहमी के बीच बिल्डर ने पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये की आर्थिक मदद दी। जिसके बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया।
शास्त्रीनगर सेक्टर-2 निवासी संजय मित्तल टाइल्स कारोबारी हैं। वह इन दिनों के-ब्लॉक शास्त्रीनगर में बेसमेंट का निर्माण करा रहे हैं। बुधवार को खुदाई चल रही थी। जाकिर कॉलोनी चमड़ा पैंठ निवासी फुरकान उर्फ गब्बर अपने छोटे भाई आस मोहम्मद (18) के साथ वहां काम कर रहा था। बताया जाता है कि फुरकान ने बुग्गी में मिट्टी भरी और उसे डालने चला गया। इसी बीच मिट्टी की एक बड़ी ढांग खुदाई में व्यस्त आस मोहम्मद के ऊपर गिर गई और वह उसी में दब गया। काफी देर तक भी जब आस मोहम्मद बाहर नहीं आया साथी मजदूर अंदर पहुंचे तो वहां आस मोहम्मद नहीं था। उन्होंने बाहर आकर शोर मचा दिया। देखते ही देखते लोगों की भीड़ जमा हो गयी। पुलिस भी आ गयी। लोग मिट्टी के नीचे दबे आस मोहम्मद को बाहर निकालकर बेहोशी की हालत में उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आस मोहम्मद की मौत की सूचना पाकर परिजन भी आ गये और हंगामा कर दिया। आदर्श सेवा समिति के अध्यक्ष अनस चौहान भी वहां आ गये और बिल्डिंग का निर्माण कराने वाले शख्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे।
चार लाख रुपये में हुआ समझौता
हादसे के बाद मेडिकल थानाध्यक्ष सतीश कुमार भी पुलिस दल के साथ मौके पर आ गये। उन्होंने हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराया और बिल्डिंग का निर्माण करा रहे संजय मित्तल और उनके बेटे से बात की। काफी देर हंगामा होता रहा। अनस चौधरी व उनके समर्थक पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद की मांग उठा रहे थे। काफी गहमा-गहमी के बाद चार लाख पर सहमति बनी। इसके बाद पीड़ित परिवार वहां से लौट गया।
निर्माण को लेकर गुस्से में दिखे लोग
हादसे के बाद क्षेत्र के काफी संख्या में लोग वहां एकत्र हो गये। इन लोगों का आरोप था कि नियम को ताक पर रखकर यह अवैध निर्माण कराया जा रहा है। निर्माणकर्ता के पास न तो बेसमेंट निर्माण की अनुमति है और न ही इस निर्माण के लिए उनकी ओर से कोई नक्शा ही एमडीए द्वारा पास कराया गया है।
समझौता हो गया
हंगामे की सूचना पर पुलिस पहुंची थी। दोनों पक्षों में काफी देर बात चली और फिर चार लाख रुपये में समझौता हो गया। इसके बाद वह शव लेकर लौट गये। मामले में पुलिस को कोई तहरीर नहीं मिली है। - सलीम अहमद, प्रभारी थानाध्यक्ष, मेडिकल