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ठंडे बस्ते में चली गयी मेनका सिनेमा की फाइल

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ठंडे बस्ते में चली गई मेनका सिनेमा की फाइल
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मेरठ। मेनका सिनेमा का मामला पूरी तरह ठंडे बस्ते में चला गया है। पहले कांवड़ यात्रा तो बाद में ईद के कारण कार्रवाई न होना बताया गया। लेकिन अब ईद और जन्माष्टमी सभी पर्व निपटने के बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। बड़ी बात ये है कि अभी तक विवादित जमीन की पैमाइश तक का काम पूरा नहीं हुआ है।
मेनका सिनेमा खसरा नंबर 542 के रकबे में बना है। राजस्व अभिलेखों में यह खसरा नंबर नजूल दर्ज है। इस सरकारी जमीन में सिनेमा बनाने के लिए जमीन को लीज पर दिया गया था, लेकिन बाद में इसकी गुपचुप तरीके से खरीद फरोख्त होती गई। पिछले दिनों जब बंद पड़े मेनका सिनेमा को तोड़ने की कवायद शुरू हुई तो प्रशासन हरकत में आया और एमडीए ने इस पर सील लगा दी। इसके साथ ही हाईटेक बिल्डर ग्रुप जिसके द्वारा नक्शा स्वीकृति के लिए एमडीए में आवेदन किया गया था, उसके कथित डायरेक्टर पुरुषोत्तम चौबे के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। वहीं इस मामले का खुलासा होने पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने भी अपनी देनदारी को लेकर सिनेमा के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया।
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इस मामले में बड़ी कार्रवाई प्रशासन को करनी थी। क्योंकि खसरा नंबर 542 नजूल में दर्ज है और पैमाइश के बाद तहसील प्रशासन को यह तय करना था कि क्या मेनका सिनेमा वास्तव में सरकारी जमीन में है या निजी जमीन में बना है। लेकिन अब तक तहसील प्रशासन मेनका सिनेमा स्थल और उसके आसपास की पैमाइश नहीं कर पाया है। जबकि अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व पैमाइश के लिए तहसीलदार सदर को पत्र लिख चुके हैं।
लेखपाल को नहीं मिल रही फोर्स
लेखपाल ने पैमाइश का आदेश मिलने पर तहसीलदार से नगर निगम से कोई एक नामित अधिकारी के साथ पुलिस फोर्स की मांग की थी। क्योंकि जिस जगह मेनका सिनेमा हाल है, वह संवेदनशील क्षेत्र है और खसरा नंबर 542 जो कि नजूल जमीन है उस पर अन्य दबंगों के भी कब्जे हैं। सूत्रों के अनुसार मेनका सिनेमा मामले में भी इसी दबंग की मुख्य भूमिका है। लेखपाल ने बिना फोर्स के यहां पैमाइश कराने से इंकार कर दिया। पहले बताया गया कि कांवड़ यात्रा निपटने के बाद पुलिस फोर्स की मौजूदगी में पैमाइश कराई जाएगी। इसके बाद ईद के बाद पैमाइश की बात कही गयी। लेकिन अब जन्माष्टमी भी निकल चुकी है, लेकिन तहसील प्रशासन द्वारा मेनका सिनेमा की पैमाइश नहीं कराई गई है। इसका बड़ा कारण पुलिस फोर्स का उपलब्ध न होना बताया जा रहा है।
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मैंने सदर तहसील को पत्र लिखा है। लेकिन अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। अब दोबारा रिमाइंडर भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद उसका परीक्षण कर कार्रवाई तय की जाएगी। आनंद कुमार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व
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