जश्न में ही भिड़े सपाई, चले लात-घूंसे
- फटे कुर्ते, फोटो खिंचवाने को लेकर हुआ विवाद
- बाद में दोनों पक्षों को समझाकर किया शांत
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में मिली जीत के बाद पार्टी कार्यालय पर जश्न मना रहे सपाई आपस में ही भिड़ गए। जमकर लात-घूंसे चले और गाली-गलौज हुई। इस दौरान दोनों सपाइयों को कुर्ते फट गए। बाद में किसी तरह समझाकर उन्हें शांत कराया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि फोटो खिंचवाने के दौरान सपा नेता बाबर चौहान और एक अन्य में धक्का-मुक्की हो गई है। गाली-गलौज केबाद बात मारपीट तक पहुंच गई। हालांकि बाद में दोनों सपाई मारपीट की बात से मुकर गए। वहीं, दूसरी तरफ सपाइयों ने आरोप लगाया कि घंटाघर पर कई पुलिसकर्मियों ने जश्न मनाने का विरोध भी किया। इसके अलावा शहर में अन्य जगह आतिशबाजी कर मिठाई बांटने वालों में वसीम राहुल, मौ. चांद, इजहार, सत्तार, जितेंद्र गुर्जर, डॉ. कय्यूम, गीता सिंह, संदीप तितौरिया, एडवोकेट कपिल राज, नियाज अहमद, प्रदीप गोयल आदि रहे। जबकि विपिन मनोठिया ने डॉ. भीमराव अंबेडकर, चौधरी चरण सिंह और डॉ. राम मनोहर लोहिया की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
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परिणाम चिंताजनक
परिणाम चिंताजनक हैं। गंभीरता से देखना होगा कि कहां कमी रह गई। इसे अति उत्साह भी कह सकते हैं। मतदान का प्रतिशत कम रहना संगठन की विफलता है। 2019 की तैयारी की दृष्टि से ये चेतावनी है, कमियां दूर की जाएंगी।
- राजेंद्र अग्रवाल, सासंद, भाजपा
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जनता का निर्णय स्वीकार
जनता का निर्णय स्वीकार है। लेकिन कहीं न कहीं इस चुनाव में वोटों का बिखराव हुआ है। इस परिणाम से सपा और बसपा मुंगेरी लाल केहसीन सपने न पाले। समीक्षा करेंगे और 2019 केलिए कार्यकर्ताओं को पूरी तरह संतुष्ट करते हुए चुनाव फतेह करेंगे।
- लक्ष्मीकांत वाजपेयी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा
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भाजपा का घमंड टूटा
सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को जनता ने स्वीकार किया है। भाजपा का घमंड टूटा है। अब 2019 की तैयारी है।
- अतुल प्रधान, सपा नेता
एतिहासिक जीत
यह ऐतिहासिक जीत सांप्रदायिकता के खिलाफ जनता की आवाज है। सपा ने सत्ता में रहते हुए जनता के लिए बहुत काम किए थे।
- सीमा प्रधान, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष
यह एक संदेश है
भाजपा की खराब नीतियों के कारण देश के नागरिक अब उन राजनीतिक पार्टियों की तरफ देख रहे हैं जो धर्मनिरपेक्ष हैं। यह जीत उसी का नतीजा है। यह एक संदेश है, जो आगे तक जाएगा।
- शाहिद मंजूर, पूर्व कैबिनेट मंत्री
गरीबों की जीत
यह ईमानदारी, वफादारी और गरीबों की जीत है। फिरकापरस्तों की हार है। इस जीत के बड़े मायने हैं।
- रफीक अंसारी, शहर विधायक
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