भाजपा जिलाध्यक्ष की पत्नी की फर्म को 6 करोड़ के ठेके
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा संगठन की नीतियों व प्राथमिकताओं को उनके ही संगठन के पदाधिकारी धता बता रहे हैं। अधिकारियों पर दबाव बनाकर अपने हित साधने में भाजपाई भी पीछे नहीं हैं। ऐसा ही एक मामला भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा का सामने आया है, जिनके दबाव में नगर निगम ने बिना ई टेंडरिंग के उनकी पत्नी की फर्म को ठेके आवंटित कर दिए। वहीं टेंडर जारी करते वक्त फर्म की तरफ से लगाए गए हैसियत प्रमाण पत्र तक की जांच नहीं की गई।
जिस फर्म के नाम ठेका दिया जाता है, उस फर्म का हैसियत प्रमाण पत्र भी टेंडर के आवेदन के साथ लगाया जाता है। लेकिन सत्ता पक्ष के पदाधिकारी के दबाव में नगर निगम ने सारे नियम कायदे ताक पर रख दिए। भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा की पत्नी ज्योति सोम के नाम पर बालाजी ट्रेडर्स के नाम से फर्म है। इस फर्म को नगर निगम द्वारा नियमों का उल्लंघन कर सबसे ज्यादा कामों के ठेके दिए गए हैं।
ये दिए गए काम
बालाजी ट्रेडर्स को इंटर लॉकिंग टाइल्स सड़क निर्माण, निगम वाहनों के मेंटेनेंस के साथ ही डस्टबिन मरम्मत का कार्य दिया गया है। इनमें एक भी कार्य के लिए ई टेंडरिंग न करके सीधे कुटेशन और मैनुअल टेंडर के जरिये इस फर्म को काम दे दिए गए। इन सभी कार्यों की कीमत करीब छह करोड़ रुपये है।
फर्म की मालिक ज्योति और हैसियत देवी सिंह की
बालाजी ट्रेडर्स फर्म रजिस्ट्रेशन का जो प्रमाण पत्र जारी हुआ है, उसमें कोई पार्टनर नहीं है। ऐसे में ज्योति सोम अकेले इस फर्म की मालिक हैं। लेकिन टेंडर के लिए किए गए आवेदन के साथ जो हैसियत प्रमाण पत्र लगा है, वह सरधना तहसील के ग्राम रार्धना निवासी देवी सिंह के नाम का है। जो कि पूरी तरह नियमों की अनदेखी है।
ये हो रहा है खेल
इस मामले में भाजपा संगठन से लेकर शासन तक गोपनीय शिकायत हुई है। जिसमें बताया गया है कि इंटरलॉकिंग टाइल्स के काम में आईएसआई मार्क टाइल्स का उपयोग करना होता है, लेकिन बालाजी ट्रेडर्स द्वारा साधारण टाइल्स का उपयोग हो रहा है। यही नहीं डस्टबिन मरम्मत के नाम भी बड़ा खेल है। आधी अधूरी और बिना गुणवत्तापूर्ण तरीके से लोहे के बड़े डस्टबिनों की मरम्मत कर बिल डाल दिया जाता है और दबाव में नगर निगम भुगतान कर देता है।
संगठन के दिशा निर्देश भी ताक पर
भाजपा संगठन के साफ निर्देश हैं कि सांसद, विधायक, पार्षद आदि जनप्रतिनिधियों के साथ ही मुख्य पदों पर बैठे पदाधिकारी सरकारी कामों के ठेके नहीं लेंगे और न ही अपने परिजनों को दिलाएंगे। लेकिन कई भाजपाई विकास कार्यों के ठेके ले रहे हैं।
30 लाख की 30 कुटेशन एक ही फर्म को
बगैर टेंडर काम जारी करने के लिए एक और भी खेल किया गया है। जिसमें एक ही काम की 30 लाख रुपये की 30 अलग-अलग कुटेशन एक-एक लाख रुपये की तैयार कराई गई और यह सारा काम बालाजी ट्रेडर्स फर्म को दे दिया गया।
सभी आरोप गलत हैं
ये काम छह-सात साल पहले के हैं और पूरी तरह नियमों के साथ टेंडर लिए गए थे। जिन्हें पूरा किया जा रहा है। जिलाध्यक्ष बनने के बाद से इस फर्म ने कोई नया टेंडर कहीं नहीं लिया है। जो आरोप हैं वह पूरी तरह गलत हैं। शिवकुमार राणा, जिलाध्यक्ष
गलत तरीके से नहीं दिए गए ठेके
निगम में किसी को गलत तरीके से ठेके नहीं दिए गए हैं। टेंडर कमेटी के निर्देशन में पूरा काम होता है। काम किसी व्यक्ति के नाम नहीं बल्कि फर्म के नाम दिया जाता है। काम के सत्यापन के बाद ही भुगतान होता है। - मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त