देश की तरक्की के लिए नई खोज जरूरी
मेरठ। देश की तरक्की के लिए नई खोज जरूरी है। इसको लेकर काम भी किया जा रहा है। पहले जिन तकनीक के लिए हमें विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था, अब अपने देश में भी वो काम हो रहा है। ऐसे में नई-नई खोज की जानी चाहिए। ये बात रविवार को मेरठ कॉलेज में रसायन विभाग की नेशनल सेमिनार में मुख्य अतिथि ने कहीं।
मेरठ कॉलेज के मूटकोर्ट हॉल में रविवार को रसायन विभाग द्वारा नेशनल सेमिनार का आयोजन किया गया। यूजीसी के तत्वावधान में हुई सेमिनार का विषय इनोवेटिव टेक्निक्स इन साइंटिफिक रिसर्च एंड स्किल डेवलेपमेंट रहा। सेमिनार में मुख्य अतिथि आईसीएसएसआर दिल्ली के मेंबर सेक्रेट्री प्रो. वीके मल्होत्रा ने कहा कि आज ऐसी नई खोज की जरूरत है जो देश की जरूरतों को पूरा कर सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भारत सरकार ने सुखोई में ब्रह्मोस मिसाइल लगाने के लिए विदेशी कंपनियों को आमंत्रित किया। कंपनियों की तरफ से इसे लगाने में 1200 करोड़ रुपये की लागत बताई गई। जबकि भारत की एचएएल द्वारा स्वदेशी तकनीक से 80 करोड़ में ही ये काम पूरा हो गया।
वहीं चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ साइंस की डीन प्रो. वाई विमला ने बायो सेंसर और रोबोटिक्स के प्रयोग के महत्व को समझाया। अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के डॉ. रामेंद्र कुमार सिंह ने एचआईवी एड्स के खिलाफ ड्रग्स डेवलपमेंट पर चर्चा की। सेमिनार की अध्यक्षता मेरठ कॉलेज की प्राचार्या बी. कुमार और संचालन रसायन विभाग की डॉ. नूपुर चटर्जी ने किया। संयोजक डॉ. रेनू सारस्वत ने विचार रखे और आयोजन सचिव डॉ. राजीव राठौर ने धन्यवाद दिया।
दो सत्र में आयोजित सेमिनार में विशेष आमंत्रित व्याख्यान डॉ. क्षेमेंद्र शर्मा एनपीएल दिल्ली ने आइसोटोप रोशियों मास स्पेक्टोमीटर पर व्याख्यान दिया। डीटीवी दिल्ली से आए डॉ. राम दसिंह ने रेनोबल और नॉन रेनोबल विषय के बारे में जानकारी दी। सेमिनार का समापन सोमवार को होगा।