सकौती बंद हुई तो दौराला से जुड़ेंगे किसान
मेरठ। मायावती सरकार में बेची गई चीनी मिलों के मामले में सुप्रीमकोर्ट के आदेश से हलचल मची है। जहां किसानों को एक चीनी मिल से दूसरे चीनी मिल के साथ जोड़ा जाना तय है वहीं गन्ना विभाग ने किसानों को समस्या से दूर रखने की कवायद शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि अगर सकौती चीनी मिल बंद करने के लिए शासन का कोई आदेश आया तो उसके सभी किसानों को दौराला चीनी मिल से जोड़ दिया जाएगा।
मेरठ मंडल में बुलंदशहर और सकौती चीनी मिल बेची गयी थी। जिनमें से बुलंदशहर वेव ग्रुप को बेची गयी थी। यह चीनी मिल पिछले चार साल से इस लिए बंद पड़ी है कि वह एनजीटी के निर्देशों का पालन ही नहीं कर रही थी। इसके अलावा सकौती चीनी मिल को 2009 से लगातार आईपीएल कंपनी चला रही है। सकौती चीनी मिल से लगभग 20 हजार किसान जुड़े हैं। इस चीनी मिल की गन्ना पेराई क्षमता पांच हजार क्विंटल गन्ना प्रतिदिन की है। न्यायालय के आदेश के बाद से सकौती चीनी मिल से जुड़े किसान परेशान हैं। किसानों का मानना है कि यदि समय रहते उनके गन्ने पेराई की व्यवस्था नहीं की गई तो समस्या खड़ी हो जाएगी। क्योंकि छोटी जोत के किसान अगैती प्रजाति के गन्ने की फसल को काटकर गेहूं की बुवाई करते हैं। वहीं उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह का कहना है कि शासन के आदेश का इंतजार है। अगर सकौती चीनी मिल को बंद करने का आदेश आता है तो उसका अनुपालन किया जाएगा। सकौती चीनी मिल के सभी किसानों को दौराला चीनी मिल से जोड़ दिया जाएगा। किसी प्रकार की किसानों को दिक्कतें नहीं आने दी जाएगी। वैसे भी दौराला चीनी मिल की एक लाख 25 हजार क्विंटल गन्ना पेराई की क्षमता है।
खास बात
गन्ना विभाग ने किसानों को समस्या से दूर रखने की कवायद शुरू की