भोपा। नंगला कबीर गांव का रहने वाला 90 वर्षीय कांवड़ियां रमेश अब तक 55 कांवड़ ला चुका है। हौसले और श्रद्धा से बुढ़ापे को मात देते हुए वह मात्र 9 घंटे में हरिद्वार से चलकर जल लेकर भोपा पहुंचा।
सिखेड़ा क्षेत्र के गांव नगला कबीर निवासी रमेश ने बताया कि उनके परिवार के एक व्यक्ति के संतान नहीं थी, जिस पर उन्होंने बोल कबूल की। कुछ समय बाद मन्नत पूरी होने पर उन्होंने कांवड़ चढ़ना प्रारंभ किया। तभी से वह कांवड़ चढ़ा रहे हैं। वह यह भी बताते है कि एक वर्ष मे दो बार श्रवण माह और फाल्गुन माह में कांवड़ चढ़ाई जाती है। कोरोना काल और एक दो बार किसी मजबूरी के कारण वह कांवड़ नहीं ला सका।
पत्नी के बीमार रहते भी लाया कांवड़
बुजुर्ग कांवड़िया रमेश बताते हैं कि बीते वर्ष उनकी पत्नी सेवा का देहांत हो चुका है। वह 30 साल तक लगातार बीमार रही। काफी सेवा भी की। पत्नी के बीमार चलते भी कांवड़ चढ़ाने का क्रम बंद नहीं हुआ। उनके बेटे वह परिवार के लोग और ग्रामीणों के चित्तौड़ा झाल पर कांवड़ियों की सेवा के लिए शिविर लगते हैं।
कांवड़ का चलन तो बढ़ा है पर नियम भूल गए
रमेश का कहना है कि कांवड़ का चलन तो बढ़ा है पर अधिकांश लोग कांवड़ चढ़ाने के नियम कायदे भूल गए हैं। वह किसी टोली में शामिल होकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर नहीं आते। कांवड़ चढ़ाने का लाभ तभी मिलता है जब हम पूरी श्रद्धा और नियम कायदो का पालन करे।
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