नगर निगम और ईईएसएल के विवाद से शहर में पसरा अंधेरा
- ईईएसएल ने धन न मिलने के कारण बंद कर दिया लाइटों को ठीक करने और जलाने बुझाने का काम
- कंपनी ने शासन में की शिकायत
मेरठ। नगर निगम और ईईएसएल के विवाद के चलते शहर की सड़कों पर अंधेरा छाया हुआ है। जहां नगर निगम ने कंपनी को लाइटें लगाने की एवज में धन नहीं दिया है, वहीं कंपनी ने काम करना बंद कर दिया है। मामला शासन तक पहुंच चुका है, लेकिन अभी तक कोई रास्ता नहीं निकला है जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।
महानगर में लगभग 50 हजार एलईडी लाइटें लगाए जाने का दावा किया जा रहा है। अभी भी लगभग छह हजार स्ट्रीट लाइट के खंभे ऐसे हैं जहां पर सोडियम लाइटें ही लगी हैं। सोडियम लाइट के समय नगर निगम पथ प्रकाश का लगभग 24 करोड़ रुपया विद्युत बिल के रूप में पीवीवीएनएल को देता था। एलईडी लगने के बाद बिजली बिल में कम से कम 50 प्रतिशत की कटौती होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा।
प्रदर्शित नहीं हो रही बिजली की बचत
- शहर में एलईडी तो लगी हैं, लेकिन बिजली का बिल कम नहीं हो पाया है। क्योंकि न तो मार्गों पर पथ प्रकाश के अलग से मीटर ही लगे हैं और न ही शहर में कहीं कंट्रोल रूम ही बनाया गया है। जिसके कारण कहीं स्ट्रीट लाइटों पर लगी एलईडी 24 घंटे जलती रहती है, और कहीं बंद ही पड़ी रहती है। जिसके कारण स्पष्ट ही नहीं हो पा रहा है कि एलईडी लगने के बाद कितनी बिजली बची। इसी के चलते नगर निगम और ईईएसएल में विवाद चल रहा है और निगम ने ईईएसएल को धन नहीं दिया है।
एक माह में शहर डूब जाएंगा अंधेरे में
- धन न मिलने के कारण कंपनी ने एलईडी लाइटों की देखरेख और मेंटेनेंस का काम बंद कर दिया है। ऐसे में शहर की ज्यादातर सड़कें अंधेरे में डूबी हैं। अगर जल्द ही निगम और ईईएसएल का विवाद नहीं सुलझा तो पूरा शहर अंधेरे में डूब जाएगा।
- कंपनी के अधिकारियों ने शासन में शिकायत की है। लेकिन बात यह है कि जब तक कंपनी शर्तों के मुताबिक रिपोर्ट तैयार नहीं करती है तब तक उनकी मांग के मुताबिक धन दिया जाना संभव नहीं है। क्योंकि अभी विद्युत विभाग से ऊ र्जा बचत की रिपोर्ट ही नहीं मिली है। ईईएसएल को पत्र लिखे जा रहे हैं। ताकि वह लाइटों को ठीक करें। - अमित सिंह, अपर नगरायुक्त।