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जिला अस्पताल में 600 से ज्यादा तरह की दवाइयां मिलेंगी सस्ती

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नहीं करें गम, दवा की कीमत है 70-90 प्रतिशत कम
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मेरठ। जिला अस्पताल में रविवार को प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र की शुरुआत हो गई। इसमें 600 से ज्यादा तरह की दवाइयां बाजार में मिल रही दवाइयों से 70 से 90 प्रतिशत तक सस्ती मिलेंगी। हृदय रोग, शुगर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और गुर्दे आदि की दवाइयां भी इसमें शामिल हैं। यहां 154 तरह का सर्जिकल का सामान भी मिलेगा। जेनेरिक दवाइयों केसाथ-साथ यहां ब्रांडेड जेनेरिक दवाइयां भी मिलेंगी।
दोपहर करीब डेढ़ बजे सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने फीता काटकर इसका उद्घाटन किया। इस दौरान जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल, सीएमओ डॉ. राजकुमार और डॉ. कल्याणी आदि रहे। सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि सरकार सस्ता इलाज कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मेडिकल कॉलेज में भी जन औषधि केंद्र खोलने की तैयारी है। इसके बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे। गौरतलब है कि सरकार की योजना के तहत प्रदेशभर में 99 जन औषधि केंद्र खोले जाने हैं। जेनेरिक दवाओं के मूल्य निर्धारण पर सरकार का अंकुश होता है, इसलिए वे सस्ती होती हैं। जबकि पेटेंट दवाओं की कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं, इसलिए वे महंगी होती हैं।
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क्या हैं जेनेेरिक दवाइयां
किसी एक बीमारी के लिए शोधों के बाद एक रासायनिक यौगिक को विशेष दवा के रूप में देने की संस्तुति की जाती है। जेनेरिक दवाइयों का नाम उसमें उपस्थित सक्रिय यौगिक के नाम केआधार पर एक विशेषज्ञ समिति निर्धारित करती है। किसी भी दवा का जेनेरिक नाम पूरे विश्व में एक ही होता है। किसी भी बीमारी के लिए डॉक्टर जो दवा लिखते हैं, उसी दवा केसॉल्ट वाली जेनेरिक दवाएं उससे काफी कम कीमत पर आपको मिल सकती हैं। जेनेरिक दवाएं उत्पादक से सीधे रिटेलर तक पहुंचती हैं। कीमत का यह अंतर पांच से दस गुना तक हो सकता है।
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आरोप भी शुरू
जन औषधि केंद्र खुलते ही आरोपों का दौर भी शुरू हो गया है। दवा कारोबार से जुड़े लोगों का आरोप है कि जन औषधि केंद्र में सिर्फ जन औषधि लिखी दवाइयां ही बेची जानी चाहिए, लेकिन यहां ब्रांडेड जेनेरिक दवाइयां भी भेजी जा रही हैं, इसके अलावा जब सरकारी अस्पताल में मुफ्त में दवाइयां मिलती हैं तो फिर अस्पताल में ही जन औषधि केंद्र खोले जाने का उद्देश्य समझ से परे है। इस संबंध में जिला अस्पताल के एसआईसी का कहना है कि उन्होंने सरकार के निर्देशानुसार जगह मुहैया कराई है। बाकी व्यवस्था औषधि केंद्र वालों ने की है।
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