सहारनपुर। जिले में विकास का पहिया रफ्तार नहीं पकड़ रहा है। इसका मुख्य कारण जिला योजना में भेजे जाने वाले प्रस्ताव के अनुरूप बजट न मिलना है। वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 349 करोड़ 35 लाख के बजट का प्रस्ताव भेजा गया था। मगर, सिर्फ 110 करोड़ 92 लाख रुपये ही मिल पाए हैं। कई विभाग तो ऐसे हैं, जिन्हें एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिल सकी है, जबकि पिछले साल यह बजट 139 करोड़ का था, जो इस बार करीब 28 करोड़ और घट गया है। ऐसे में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठने लाजिमी है।
पिछले पांच सालों में जिला योजना के प्रस्तावित बजट का एक तिहाई पैसा जनपद के विभिन्न सरकारी महकमों को मिल पाया है। हर वर्ष जनपद में तमाम विकास कार्य कराने के लिए जनप्रतिनिधियों और लोगों की अपेक्षा के अनुरूप प्रशासन जिला योजना के बजट का प्रस्ताव तैयार करता है। इसके लिए जिला योजना से जुड़े सरकारी विभागों में किस काम के लिए कितने पैसे की जरूरत है, उसकी सूची तैयार की जाती है। अफसर और जनप्रतिनिधियों के मंथन के बाद सरकार को प्रस्ताव भेजा जाता है। मगर, पांच सालों से सहारनपुर को पर्याप्त बजट नहीं मिलने की वजह से विकास की रफ्तार धीमी हो गई है। खासकर वर्तमान में केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद वित्तीय वर्ष 2017-18 में पूरा तो दूर आधा बजट भी जिले को नहीं मिल पाया है। सूत्रों के अनुसार 349 करोड़ 35 लाख का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन 110 करोड़ 92 लाख रुपये ही शासन से अनुमोदित हो सके। दिलचस्प बात यह है कि 23 विभागों की झोली पूरी तरह खाली रह गई, जिनको एक रुपया भी नहीं मिला है। ऐसे में जनपद में विकास की रफ्तार और धीमी हो गई है।
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इन्हें नहीं मिला एक भी रुपया
सहारनपुर। पिछड़ी जाति कल्याण, अस्पतालों और औषधालयों के लिए बेहतर सुविधाएं, उद्यान विभाग, उत्पादन, सिंचाई एवं जन संसाधन, भूमि सुधार, पंचायत भवन निर्माण, सामुदायिक विकास, बाढ़ नियंत्रण, रेशम विकास, उच्च शिक्षा, खेलकूद, परिवार कल्याण, होम्योपैथी, अल्पसंख्यक कल्याण, जनजाति कल्याण छात्रवृत्ति को एक रुपया भी जिला योजना के तहत नहीं मिला है।
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सिर्फ इन्हें मिला बजट
सहारनपुर। अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों के अनुसार कृषि विभाग को 36 लाख, गन्ना विकास को 4.80 करोड़, पशुपालन विभाग को एक करोड़, दुग्ध विकास को 79 लाख, वन विभाग को 47 लाख 10 हजार, ग्राम विकास को तीन करोड़ 12 लाख, रोजगार कार्यक्रम 20 करोड़, लघु सिंचाई को 25 लाख, राजकीय लघु सिंचाई 20 लाख, खादी ग्रामोद्योग, राजकीय लघु सिंचाई को 20 लाख, खादी ग्रामोद्योग को पांच लाख, पुल व सड़क के लिए 33 लाख 20 हजार, पर्यटन 40 लाख, प्राथमिक शिक्षा 25 लाख, माध्यमिक शिक्षा 3.57 करोड़, ग्रामीण पेयजल को 7.62 करोड़, ग्रामीण स्वच्छता को 6.60 करोड़, ग्रामीण आवास 6.65 करोड़, नगर विकास को 60 लाख, अनुसूचित कल्याण 8.52 करोड़, समाज कल्याण को 40 करोड़, महिला कल्याण को चार करोड़ दो लाख और पुष्टाहार को 40 लाख रुपये मिले हैं।
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जिला योजना के पांच वर्ष के आंकड़े
वित्तीय वर्ष, भेजा प्रस्ताव, मिला बजट
2013-14, 149 करोड़, 64 करोड़ 99 लाख
2014-15, 149 करोड़, 27 करोड़ 18 लाख
2015-16, 344 करोड़ , 144 करोड़
2016-17, 351 करोड़, 139 करोड़
2 017-18, 349 करोड़ 35 लाख, 110 करोड़ 92 लाख
जिला योजना के तहत 349 करोड़ 35 लाख का प्रस्ताव भेजा गया था। शासन के अनुमोदन के बाद 110 करोड़ 92 लाख प्राप्त हुए है। यह बात सही है कि पर्याप्त बजट न मिलने की वजह से विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है। --संजीव रंजन, मुख्य विकास अधिकारी