मेरठ। सर्दी में गरीब सड़कों पर ठिठुर रहे हैं। लेकिन नगर निगम प्रशासन की नींद अभी टूटी नहीं है। रैन बसेरों पर ताला पड़ा है। न चौकीदार तैनात किए गए हैं और न ही रजाई, गद्दों की व्यवस्था की गयी है। सुप्रीम कोर्ट और सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
महानगर में 14 रैन बसेरे हैं। लेकिन गरीबों को ठहराने के लिए एक भी नहीं खोला गया है। नियमानुसार 15 नवंबर को सभी रैन बसेरे खुल जाने चाहिए थे। इस संबंध में नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. कुंवरसेन से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि सभी रैन बसेरों का निरीक्षण कराकर रजाई, गद्दे आदि सामान की सूची तैयार कर ली गयी है। नगरायुक्त शहर से बाहर हैं। उनके आने के बाद रैन बसेरों को खोलने का निर्णय लिया जाएगा।