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एमडीए में बना किसानों का हिसाब

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लंबी मशक्कत के बाद मिलेगा 150 करोड़ का मुआवजा
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- लोहियानगर, वेदव्यासपुरी तथा गंगानगर के किसानों का बना 150 करोड़ रुपये का हिसाब
- कम से कम मिलेगा किसान को प्रतिकर के बदले तीस मीटर का प्लाट
- तीस मीटर के प्लाट से कम बन रहा है प्रतिकर तो मिलेगा नगद
- जिन्होंने कब्जा रखी जमीन, या तो छोड़ेंगे या होगा समायोजन


अमित मुदगल

मेरठ। लंबी लड़ाई, आंदोलन और लगातार किए गए किसानों के संघर्ष के बाद तीन योजनाओं के किसानों को दिए जाने वाले प्रतिकर का आकलन लगभग तैयार है। हालांकि इस हिसाब में एमडीए अधिकारियों केपसीने छूट गए पर अब किसानों को दिये जाने वाले 150 करोड़ रुपये का हिसाब तैयार है। जिन किसानों का मुआवजा कुल ढाई लाख से कम बन रहा है तो उन्हें तो नगद ही देना होगा। बाकी के लिए भूखंड देने के लिए फाइल को अलग अलग अंतिम रूप दिया जा रहा है।

यह है पूरा प्रकरण
1987 में शताब्दीनगर, लोहियानगर, गंगानगर तथा वेदव्यासपुरी योजना लांच की गई थी। किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया। सभी किसानों को मुआवजा भी लगभग एक समान दिया गया। वर्ष 2011 में शताब्दीनगर के किसानों ने आंदोलन किया तो 690 रुपये प्रति वर्ग मीटर की हिसाब से उन्हें प्रतिकर दे दिया गया। इस पर बाकी तीनों योजनाओं के किसानों ने भी आंदोलन का बिगुल बजा दिया। दो साल पहले बोर्ड बैठक में उनका भी प्रतिकर इसी आधार पर तय हो गया पर शर्त यह लगी कि इन किसानों को प्रतिकर के बदले भूखंड दिए जाएंगे। तब से अब तक यह समझौता लागू ही नहीं हुआ था। अब मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार ने इसेे सख्ती से लागू कराने को कहा तो एमडीए ने हिसाब किताब लगभग तैयार कर लिया है।
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इस रेट से तय हुआ है प्रतिकर
जो गणना की गई है उसके मुताबिक पिछली किसानों को दी गई रकम तथा उसका ब्याज काटकर भुगतान किया जाएगा। किसानों ने वर्ष 2003 वर्ष 2007 तक प्रतिकर उठाया। एमडीए 31 मार्च 2011 तक चक्रवृद्घि ब्याज दर नौ प्रतिशत के हिसाब से काट रहा है। यानी जिसने बाद में पैसा लिया उसका ब्याज कम कट रहा है। लोहियानगर और वेदव्यासपुरी से पहले दिया गया 165 रुपये के साथ ब्याज काटा जा रहा है और गंगानगर में 210 और ब्याज कट रहा है। इस हिसाब से वेदव्यासपुरी के किसानों को अब लगभग 275 रुपये प्रति वर्ग मीटर, लोहियानगर का लगभग 250 तथा गंगानगर का 170 से लगभग 275 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक रेट बन रहा है। दरअसल एमडीए द्वार दिए गए अवार्ड का अंतर 36 रुपये 55 पैसे एक तथा 504 रुपये दूसरी बार का अंतर दिया। कुल 540 प्रति वर्ग मीटर में से दी गई रकम काटकर यह पैसा बन रहा है। ऐसे में लगभग 150 करोड़ रुपये का हिसाब बना है।

कब्जे में है जमीन तो होगा समायोजन
किसानों के कब्जे में काफी जमीन है, जिसका एमडीए समायोजन कर रहा है। अहम बात यह है कि उस जमीन का रेट भी एमडीए 31 मार्च 2011 की दर से ही लगा रहा है जिससे किसानों को काफी लाभ होगा। गंगानगर में यदि किसी किसान को जमीन ही रखनी है तो लगभग 7280 रुपये वर्ग मीटर, लोहियानगर में 6500 रुपये तथा वेदव्यापुरी में 8000 रुपये की दर से जमीन उसी किसान को छोड़ दी जाएगी। यदि किसी किसान ने तय रेट से ज्यादा जमीन कब्जा रखी है तो उसे उसका पैसा जमा करना होगा पर यह पैसा नई दर से जमा करना होगा। किसान के मुआवजे को अंतिम रूप तभी दिया जाएगा जब या तो किसान जमीन छोड़ देगा या यदि समायोजित करनी है तो उसके दस्तावेज जमा करेगा।

एमडीए को फिर भी 300 करोड़ का लाभ, आवंटियों को राहत
भले ही एमडीए को लगभग 150 करोड़ रुपये या उसके बदले जमीन देनी पडे़ पर एमडीए को इसका बड़ा लाभ होगा। लगभग 300 करोड़ रुपये की वह जमीन एमडीए को मिल जाएगी तो किसानों के कब्जे में है। इसके अलावा इन योजनाओं के विवाद खत्म हो जाएंगे तो यहां चल रही विकास की योजनाओं पर भी काम हो सकेगा।

छोटे मुआवजे नकद
यदि किसी किसान का मुआवजा कम है तो उसे नकद दिया जाएगा। लगभग ढाई लाख रुपये मुआवजा वाले किसानों को सबसे छोटा तीस मीटर का प्लाट मिलेगा। एमडीए में तीस और 60 मीटर के छोटे प्लाट हैं। यदि किसी किसान की रकम 55 मीटर प्लाट के बराबर बैठ रही है तो उसे तीस मीटर का प्लाट और 25 मीटर के बदले मुआवजा मिलेगा।
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वर्जन
बोर्ड में लिए गए निर्णय का शत प्रतिशत अनुपालन होगा। उस पर हिसाब बनाया जा रहा है। मैने एमडीए अधिकारियों को साफ कहा है किसानों का हिसाब बनाकर उनका पेमेंट जल्द शुरू करो ताकि भावी योजनाओं पर भी कम हो सके- डा. प्रभात कुमार आयुक्त एवं अध्यक्ष एमडीए
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