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जागरूकता से सुधरेंगे मेडिकल के हालात

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केजीएमयू के प्रोफेसर बोले, सुविधाओं के साथ-साथ जागरूकता से सुधरेंगे मेडिकल के हालात
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मेरठ। मेडिकल कॉलेज में पहले दिन के निरीक्षण के बाद केजीएमयू के प्रोफेसर डॉ. जीके सिंह मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में बजट की कमी और कई तरह की असुविधाएं हैं। कुछ चीजें बेहतर भी हैं तो कुछ कमतर हैं। जागरूकता, जरूरत के लिहाज से ही सरकारी सुविधाएं लेने और मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई के स्तर को सुधार कर इसे बेहतर किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी जागरूकता है। गोरखपुर में हुई बच्चों की मौत बेहद दुखद है, मामले में लापरवाही हुई थी। लेकिन दूसरी तरफ जागरूकता की कमी के कारण देश में हर साल दो लाख लोग तंबाकू के सेवन से मर जाते हैं। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि हर साल एक टाइटेनिक डूबता है। उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत से लोग हैं, जो इस काबिल हैं कि उन्हें सरकारी मुफ्त इलाज की जरूरत नहीं है, इसके बावजूद वे लोग मुफ्त इलाज लेते हैं और इसकी वजह से कई गरीब लोग इलाज से वंचित रह जाते हैं। जरूरत के हिसाब से इलाज लें तो इस तरह की दिक्कत न आए। उन्होंने कहा कि हर मर्ज के लिए अब एक्सपर्ट डॉक्टर चाहिए। सरकारी अस्पताल में ऐसा संभव नहीं है। प्राइवेट में डॉक्टरों को बेहतर सुविधाएं और तनख्वाह मिलती है। ऐसे में वे सरकारी में नौकरी क्यों करेंगे। इसके लिए एमबीबीएस की पढ़ाई को और बेहतर किया जाए तो यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।
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सीखना चाहें तो यूट्यूब से भी सीख सकते हैं
प्रोफेसर डॉ. जीके सिंह ने बताया कि आजकल यूट्यूब पर तमाम तरह की जानकारियां मिल जाती हैं, अगर कोई सीखना चाहे तो वहां से भी सीख सकता है। वह अपने हर लेक्चर की वीडियो यूट्यूब पर डालते हैं। इसके अलावा संकटमोचन वेबसाइट है, जहां से काफी नॉलेज मिल सकती है।
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फोटो- अरुण जी की मेल पर है।

कर्मचारी एसोसिएशन ने गिनाईं खामियां
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद और मेडिकल कॉलेज कर्मचारी महासंघ ने केजीएमयू प्रोफेसर को मेडिकल की खामियों के बारे में बताते हुए ज्ञापन भी दिया। उन्होंने कहा कि यहां दिल और दिमाग के डॉक्टर नहीं हैं। तीन साल से रेडियोथैरेपी की मशीन खराब है। एक्सरे फिल्म नहीं दी जाती है। दवाओं का पैसा रसायन में इस्तेमाल कर लिया जाता है। 50 बेड का प्राइवेट वार्ड 30 सालों से बंद पड़ा है। इन्हीं मांगों को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारी धरने पर भी बैठे हैं।
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