मेरठ। हापुड़ अड्डा चौराहा स्थित सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए कांप्लेक्स को एमडीए टीम ने सोमवार सवेरे ध्वस्त कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी और भारी सुरक्षा बल के साथ टीम ने 66 दुकानाें को गिरा दिया। कार्रवाई सुबह 6:30 बजे से शुरू होकर पांच घंटे तक चली। फोर्स ने पूरे इलाके की नाकेबंदी कर कांप्लेक्स के सामने रूट डायवर्ट कर दिया। ‘अमर उजाला’ की खबर पर प्रशासन ने गंभीर रुख अपनाते हुए इस मामले में तेजी से कार्रवाई की और 40 दिन के भीतर पूरी कार्रवाई को अंजाम दे डाला। हालांकि अभी इस परिसर में 27 और बड़े पुराने कब्जेदार हैं, जिनके ऊपर कार्रवाई प्रस्तावित है।
मंडलायुक्त के सख्त रुख ने दिया कार्रवाई को अंजाम
शहर में पहली बार अवैध निर्माण पर इतनी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। तमाम राजनीतिक दबावों के बावजूद जिस तेजी से प्रशासन और एमडीए ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, उसमें पूरी तरह मंडलायुक्त की इस प्रकरण पर पैनी नजर को माना जा रहा है।
ये रहे कार्रवाई में शामिल
एमडीए की तरफ से जोन-4 के प्रभारी एपी सिंह के नेतृत्व में अधिशासी अभियंता पीपी सिंह, एमडीए तहसीलदार करनवीर सिंह, मनोज सिंह, नगर मजिस्ट्रेट एमपी सिंह, एसीएम सिविल लाइन गुलशन कुमार, सीओ सिविल लाइन पंकज कुमार, कई थानों की फोर्स सहित मौजूद रहे
अन्य कब्जेदार देंगे 8 अगस्त को जवाब
हापुड़ अड्डा चौराहा स्थित नजूल की कुल 3991.65 वर्ग मीटर जमीन पर 93 कब्जेदार हैं। इनमें 1675 वर्ग मीटर जमीन पर बने कांप्लेक्स पर तो सोमवार को कार्रवाई हो गयी। लेकिन अभी 27 कब्जेदार और बचे हैं, जिनके पास बड़ा भूभाग है। इन लोगों को अब अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने 8 अगस्त को अंतिम रूप से जवाब दाखिल करने का समय दिया है।
ये था पूरा मामला
हापुड़ अड्डा चौराहा के पास खसरा नंबर 4632 नजूल की 4930 वर्ग मीटर जमीन है। इस जमीन के 1675 वर्ग मीटर जमीन पर बिल्डर यूनुस द्वारा अवैध रुप से कब्जा कर 66 दुकानों के कांप्लेक्स का निर्माण कर दुकान बेच दी गयी। अमर उजाला ने 21 जून को समाचार प्रकाशित करते हुए पूरे मामले का खुलासा किया तो मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार ने पूरी गंभीरता से मामले को लेते हुए अपर जिलाधिकारी प्रशासन सत्यप्रकाश पटेल को इसकी जांच कराकर रिपोर्ट देने के लिए कहा। तहसील प्रशासन ने अगले ही दिन 22 जून का अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। रिपोर्ट में 3991.65 वर्ग मीटर जमीन पर 93 लोगों ने अवैध रुप से कब्जा कर रखा है। इन लोगों में यूनुस का कांप्लेक्स भी शामिल है। इस रिपोर्ट के तत्काल बाद 29 जून को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने सभी कब्जेदारों को नोटिस जारी कर उनके मालिकाना हक के संबंध में साक्ष्य सहित 8 जुलाई को जवाब प्रस्तुत करने के नोटिस जारी कर दिये। वहीं एमडीए की टीम ने 4 जुलाई को कांप्लेक्स में बनी 66 दुकानों को खाली कराकर सील लगाने की कार्रवाई कर दी। इस बीच 8 जुलाई को 93 में से मात्र पांच ही कब्जेदारों ने जवाब दिया। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट सचिन सैनी ने तहसील प्रशासन की रिपोर्ट और अमर उजाला में प्रकाशित खबरों को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। जिस पर हाईकोर्ट ने दो माह के भीतर जिलाधिकारी को इस मामले में कार्रवाई का आदेश दिया।
खास बात
- 66 दुकानें बनायी गयी थीं 1675 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर
- 21 जून को अमर उजाला ने खबर प्रकाशित कर किया था खुलासा
- जांच के बाद आखिर एमडीए और प्रशासन की टीम ने फोर्स के साथ किया ध्वस्तीकरण