बिजनौर। परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों का समायोजन आंकड़ों के मकड़जाल में उलझ रहा है। जिले में जितने शिक्षक सरप्लस (अधिक) हैं, उनके समायोजन के लिए उतने पद भी नहीं हैं। प्राथमिक में 801 प्रधानाचार्याें की सरप्लस सूची जारी की गई है जबकि जरूरत वाले विद्यालय केवल 20 हैं।
यही स्थिति प्राथमिक के सहायक अध्यापकों की है। जिले में 542 स्कूलों में 588 सहायक अध्यापक सरप्लस दिखाए गए हैं। इसके विपरीत 236 स्कूलों में 327 पदों पर इन्हें समायोजित किया जाना है। सरप्लस सूची में शामिल प्रधानाचार्याें और शिक्षकों को कहां समायोजित किया जाएगा, इस संबंध में कुछ निर्देश नहीं हैं।
उच्च प्राथमिक स्कूलों में उल्टी है स्थिति : जिले के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्राथमिक विद्यालयों से उलट स्थिति है। उच्च प्राथमिक स्कूलों में 16 प्रधानाचार्याें को सरप्लस दिखाया गया है जबकि जरूरत वाले स्कूल 175 हैं। यही हाल सहायक अध्यापकों का है। यहां सरप्लस सूची में 101 शिक्षक शामिल हैं जबकि जरूरत वाले विद्यालय 188 हैं।
दस साल से पदोन्नति न होने से बिगड़े हालात : दस साल से प्राथमिक शिक्षकों की पदोन्नति नहीं हुई है। यदि पदोन्नति हो जाती तो उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी नहीं होती और प्राथमिक स्कूलों में भी शिक्षक सरप्लस नहीं होते। उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य पद पर भी वर्षों से पदोन्नति नहीं हुई। इसलिए ये स्कूल प्रभारी प्रधानाचार्याें के दम पर ही चल रहे हैं। यही कारण है कि पद अधिक होने के बावजूद प्रधानाचार्याें की तैनाती कम है।