जनपद के 1300 स्कूलों के कनेक्शन कटे
175 स्कूलों को नहीं मिला बिजली कनेक्शन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए पंखे की हवा और बल्ब की रोशनी एक सपना बनकर रह गई है। जनपद के 175 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अभी तक बिजली कनेक्शन नहीं हुए हैं तो वहीं 1300 स्कूलों के बिजली कनेक्शन कटे पड़े है। जिसके चलते बच्चों की सर्दियां तो अंधेरे में कट गई और अब गर्मी में पसीने भी छूटेंगे। शासन से न तो नए कनेक्शन के लिए और न ही बकाया बिजली बिल भुगतान के लिए धनराशि मिल रही है।
जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग के 1057 प्राथमिक और 418 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। कुल मिलाकर 1475 विद्यालय हैं। भले ही बेसिक शिक्षा विभाग स्कूलों के जीर्णोद्धार और शिक्षा की गुणवत्ता के सुधार की बात करता हो, लेकिन सच्चाई स्कूलों में धरातल पर साफ दिखाई दे रही है। न तो बच्चों के बैठने के पर्याप्त फर्नीचर हैं और न ही लाइट और बिजली के पंखों की हवा। बेसिक शिक्षा विभाग के रिकार्ड के मुताबिक जिले में एक भी स्कूल ऐसा नहीं है जहां वर्तमान में बिजली हो। अंधेरे कमरों में बैठकर बच्चों ने सर्दी में पढ़ाई की। अब बारी गर्मी की है। गर्मी को देखकर स्कूल के बच्चे ही नहीं बल्कि अभिभावकों को भी पसीने छूट रहे हैं।
दस साल में भी पूरा नहीं हुआ स्कूलों का विद्युतीकरण
वर्ष 2008 में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक परिषदीय विद्यालयों का विद्युतीकरण करने का सपना दिखाया गया था। सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने और बच्चों को बिजली, पंखे, लाइट की सुविधा देने के झूठे सपने दिखाए जा रहे हैं। इनकी सच्चाई जनपद के देहात और शहरी स्कूलों में देखी जा सकती है। आठ साल पहले लगवाए गए बिजली के कनेक्शन कट चुके हैं। इतना ही नहीं काफी स्कूलों से पंखे और लाइटें तक चोरी कर ली गई है।
शासन से नहीं मिल रही बिजली बिल धनराशि
- बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को यह तो पता है कि उनके प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की बिजली कट चुकी है। लेकिन यह संख्या इनके पास उपलब्ध नहीं कि बिजली बिल जमा करने के लिए कितनी धनराशि की जरूरत है। विभाग के लिपिक ने विद्यालयों में अंधेरा और पंखे बंद होने के लिए शासन को जिम्मेदार ठहरा दिया है।
शासन से धन की डिमांड की जा चुकी है। पिछले साल कुछ धनराशि बिजली बिल के लिए मिली थी। जो पीवीवीएनएल में जमा कर दी गई। अनाप सनाप बिजली बिल आए हुए है। जबकि प्रत्येक स्कूल के लिए 300 रुपये प्रतिमाह का बिजली बिल निर्धारित है। स्कूलों में बिजली कनेक्शन और बंद पड़ी लाइट को चालू कराने के लिए शासन से बजट मांगा है। गर्मी आने से पहले ही बजट मिलने की पूरी उम्मीद है।
सतेंद्र ढाका, बीएसए