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पबजी, मोबाइल गेम बन रहे मुसीबत

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परीक्षा में भी नहीं छूट रहा ऑनलाइन गेम का मोह
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-सीबीएसई हेल्पलाइन पर छात्र ही नहीं अभिभावकों की आ रही हैं शिकायतें
-हर वक्त गेम खेलने का करता है मन, पढ़ाई की तरफ नहीं दे पाते ध्यान
मेरठ।
पबजी, पोकेमोन और फोर्टनाइट मोबाइल गेम बोर्ड परीक्षा में बाधा बन रहे हैं। ऑनलाइन गेमिंग के दीवाने छात्र परीक्षा के वक्त में भी मोबाइल गेम से दूर नहीं हो पा रहे हैं। सीबीएसई द्वारा शुरू की गई परीक्षा हेल्पलाइन पर प्रतिदिन अभिभावकों और छात्रों के फोन कॉल्स आ रहे हैं। अधिकांश शिकायतें ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया से जुड़ी हुई हैं। अभिभावक परेशान हैं कि बच्चा पढ़ाई से ज्यादा वक्त मोबाइल और गेमिंग को दे रहा है। वहीं छात्र भी इस समस्या से त्रस्त हैं। छात्रों की शिकायतेें हैं कि पढ़ाई में मन केंद्रित नहीं हो पा रहा। थोड़ी सी पढ़ाई के बाद ही दिमाग मोबाइल, फेसबुक और चैटिंग की ओर भागने लगता है। सीबीएसई की वोकेशनल विषयों की परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। मुख्य विषयों की परीक्षाएं 01 मार्च से शुरू हो रही हैं।
इन उपायों से दूर करें गेमिंग एडिक्शन
सीबीएसई काउंसलर डॉ. पूनम देवदत्त के अनुसार गेमिंग एडिक्शन को दूर करने में अहम भूमिका अभिभावकों की है। बच्चे को डांटने या चीखने की बजाय उसकी काउंसलिंग करें। उसे पढ़ाई का महत्व बताएं। उसे सिखाएं कि यह वक्त गया तो वापस नहीं आएगा। छात्र ध्यान और योग नियमित तौर पर करें। हल्का भोजन करें। मोबाइल, सोशल मीडिया को स्वयं से बिल्कुल अलग कर दें। एकदम से मोबाइल का मोह नहीं छूट रहा तो दिन में समय तय करें कि 10 मिनट इस समय मोबाइल देखना है। इस अभ्यास से अपने आप यह आदत छूट जाएगी। गेम, सोशल मीडिया को अनइंस्टाल भी कर सकते हैं। अभिभावक स्वयं इस तरह कि गतिविधियों से खुद को दूर करें।
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डीसीपीसीआर कर चुका है निर्देश जारी
दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग पहले ही स्कूलों को मोबाइल गेम्स के कारण छात्रों पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव के लिए सचेत कर चुका है। पबजी, पोके मोन, फोर्टनाइट, ग्रांड थेफ्ट ऑटो, गॉड ऑफ वार, हिटमैन जैसे ऑनलाइन गेम्स को हानिकारक व दिमाग पर निगेटिव असर डालने वाला बताया था। स्कूलों को निर्देश दिया था कि वे प्रार्थना सभाओं में छात्रों क ो व पीटीएम में अभिभावकों को इन गेम्स के नुकसान बताकर गेम्स से दूर रहने के लिए कहें। स्कूलों को रिपोर्ट आयोग को भी भेजने का निर्देश दिया था।
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वर्जन--
ऑनलाइन गेम्स छात्रों को निगेटिव सोच की ओर ले जा रहे हैं। बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता बल्कि वो हर समय गेम की एक्टिविटी में खुद को महसूस करता है। खेल-खेल में ही बच्चे का व्यवहार बदल जाता है। इससे बच्चे की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। प्रतिदिन 4-5 मामले मोबाइल गेमिंग से परेशानी के आते हैं।
डॉ. पूनम देवदत्त सीबीएसई काउंसलर, मनोवैज्ञानिक
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