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भाजपा के लिए वर्तमान सीटें जीतना बड़ी चुनौती

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भाजपा के लिए वर्तमान सीट जीतना बड़ी चुनौती
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मेरठ।
जनपद में नगर निकायों में अधिक से अधिक सीट जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही भाजपा के सामने इस बार वर्तमान सीटों को बचाना भी किसी चुनौती से कम नजर नही आ रहा है। जनपद की 16 निकायों में से मात्र दो सीटें इस समय भाजपा के कब्जे में हैं। इन सीटों पर हालांकि स्थिति बेहतर है, लेकिन जातीय गणित ने मामला फंसा दिया है।
जनपद में एक नगर निगम निगम, दो नगर पालिकाओं के साथ ही इस बार 13 नगर पंचायत हैं। हालांकि पिछली बार नगर पंचायतों की संख्या 10 थी। पिछले चुनाव में भाजपा को सिर्फ नगर निगम मेरठ के महापौर और एक नगर पंचायत परीक्षितगढ़ में सफलता मिली थी। यहां पर भाजपा ने बहुत अच्छे अंतर से जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार गणित उलझ गया है।
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परीक्षितगढ़ नगर पंचायत में मुस्लिम वोट निर्णायक स्थिति में हैं। अनारक्षित सीट पर यह पहली बार हुआ है कि कोई मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में नहीं है। जबकि पिछले चुनावों में हमेशा मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में रहे। यह बात अलग है कि यहां पर 1989 में हुए नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में ही मुस्लिम मतदाताओं ने मुस्लिम प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट होकर वोट किया। इसके बाद मुस्लिम वोटर अपने संप्रदाय के प्रत्याशी से अलग दूसरे वर्ग के प्रत्याशी पर दांव खेलते रहे। इसका परिणाम भी मुस्लिम मतदाताओं को मिला और उनके एकजुट होने से उनका प्रत्याशी जीतता रहा।
लेकिन 2012 के चुनाव में मुस्लिम वोटर तो एकजुट हुए, लेकिन भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में नगर पंचायत का 60 प्रतिशत हिंदू वोटर भी एकजुट हो गया। जिसके चलते भाजपा प्रत्याशी को यहां अच्छी बढ़त के साथ जीत हासिल हुई। लेकिन इस बार यहां का माहौल बदला है। अनारक्षित सीट पर चार ही प्रत्याशी मैदान में हैं। जिसमें एक को डमी के तौर पर देखा जा रहा है। यहां इस बार सीधा मुकाबला दलीय स्थिति में भाजपा, सपा और बसपा के बीच है। भाजपा से जहां निवर्तमान चेयरपर्सन राखी मोहन गुप्ता के पति अमित मोहन गुप्ता मैदान में हैं तो बसपा से दो बार चेयरमैन रह चुके हिटलर त्यागी तीसरी बार चुनाव मैदान में हैं। जबकि सपा से पहली बार संदीप त्यागी चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन एक भी मुस्लिम प्रत्याशी का न होना सभी को चौंका रहा है। ऐसे में हिंदू वोटों के बंटवारे के बीच यहां मुस्लिम वोटों का रुख चुनाव परिणाम तय कर सकता है।
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यही स्थिति इस बार नगर निगम में है। अनुसूचित जाति महिला के लिए सीट आरक्षित होने पर नगर निगम में भी मुस्लिम वोटर गणित को उलझा रहे हैं। क्योंकि दलित और वाल्मीकि वोट को छोड़ दें तो बाकी वोट जहां भाजपा के पक्ष में नजर आ रहे हैं वहीं मुस्लिम वोट का रुख अभी कोई भी नहीं समझ पा रहा है।
खास बात
मेरठ नगर निगम सहित नगर पंचायत परीक्षितगढ़ पर है भाजपा का कब्जा
दोनों ही निकायों में इस बार नहीं उतरा मुस्लिम प्रत्याशी
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