मेरठ। होली की छुट्टी खत्म होते ही लोगों ने अपने गंतव्य की ओर जाना शुरू कर दिया। रविवार को निकली भारी भीड़ के सामने रोडवेज पस्त नजर आया। होली अभियान के दावे धरे रह गए। लोग घंटों तक इंतजार करते रहे। लेकिन बसें नहीं मिलीं। जो भी बस आई, उसमें चढ़ने के लिए मारामारी मचती रही। बस में घुसने की कोशिश में लोग एक-दूसरे से लड़ते रहे। काफी लोग बसें नहीं मिलने पर घर को लौट गए।
होली के लिए रोडवेज निगम ने गत 26 फरवरी से 5 मार्च तक होली अभियान की घोषणा की थी। दावा किया था कि किसी भी यात्री को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। होली पर घर आए लोग रविवार को छुट्टी खत्म होने के बाद अपनी ड्यूटी और कारोबार के लिए रवाना होनेे लगे। सुबह से ही लोगों की भीड़ भैसाली और सोहराबगेट बस अड्डे पर पहुंचनी शुरू हो गई थी। दोपहर तक तो लोगों को बस मिलती रही। लेकिन इसके बाद बसों का टोटा हो गया।
दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, मोहननगर आदि जाने वाले लोग बसों का इंतजार करते रहे। लेकिन उन्हें बस नहीं मिली। जो भी बस अड्डे पर पहुंचती तो उसमें बैठने के लिए भीड़ भागने लगती। युवा तो किसी तरह बस में चढ़ते रहे। लेकिन महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को जगह नहीं मिली। लोगों ने सीट कब्जाने के लिए खिड़की का सहारा लिया। कई लोगों ने तो अपने बच्चों को खिड़की से घुसाकर सीट पर बैठा दिया।
हाइवे पर लगा जाम, घंटो तक नहीं लौटी बसें
गाजियाबाद और मोदीनगर आदि में लगा लंबा जाम बसों के लिए खतरनाक साबित हुआ। दोपहर करीब 12 बजे लगा जाम देर शाम तक जारी रहा। जाम में फंसी बसें शाम तक नहीं लौट सकीं। लोगों के भारी हंगामे के बाद वर्कशॉप में रिजर्व में खड़ी बसो को भी निकाला गया। लेकिन बात नहीं बनी। भारी भीड़ के सामने बसों की संख्या कम पड़ गई।
तो न होती कोई परेशानी
रोडवेज अधिकारियों ने बताया कि रविवार को हाइवे पर लगा जाम बसों के लिए मुसीबत बना। अगर बसें जाम में न फंसतीं तो लोगों को बस अड्डों पर बसों का इंतजार न करना पड़ता। बस आती रहतीं और सवारी आराम से अपनी मंजिल की ओर जाती रहतीं। देर रात तक ही जाम से निजात मिलने पर बसों का आवागमन सामान्य हो सका।
स्टाफ ने भी दिया धोखा
रोडवेज ने होली अभियान के तहत संचालन में लगे स्टाफ की छुट्टी प्रतिबंधित कर दी थी। साथ ही बसों के संचालन को सही रखने के लिए चालकों एवं परिचालकों के अलावा वर्कशॉप के तकनीकी स्टाफ के लिए इंसेंटिव की भी घोषणा की थी। लेकिन इसके बावजूद 20 फीसदी स्टाफ गायब रहा। स्टाफ की कमी के चलते शत प्रतिशत बसों का संचालन नहीं हो सका। इसके अलावा करीब दस फीसदी बसें बीमार होने के चलते वर्कशॉप में खड़ी रहीं। 70 फीसदी बसें ही अभियान में चलाई जा सकीं।
गायब रहे स्टाफ पर होगी कार्रवाई
रोडवेज के रीजनल मैनेजर एसके बनर्जी ने बताया कि रविवार को होली की छुट्टी खत्म होने के बाद लोग घरों से लौटना शुरू हुए। इसके चलते मार्गों पर लगे जाम में बसें फंस गईं, जो बस अड्डे पर नहीं पहुंचीं। इसके चलते ही लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। छुट्टी प्रतिबंधित होने के बाद भी गायब रहने वाले स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई होगी।
खास बातें:
- सोमवार से काम पर जाने के लिए रविवार को गंतव्य की ओर रवाना हुए लोग
- बसें नहीं मिलने से हुई भारी परेशानी, जाम में फंसी रहीं बसें, अड्डे तक नहीं पहुंचीं