मेरठ। तीरंदाजी में प्रदेश स्तर पर नाम कमा चुकीं अंजू शर्मा ने कई मेडल जीते। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने उनका मान नहीं बढ़ाया। सरकारी नौकरी न मिलने से मायूस अंजू ने खेल के साथ स्नातक की पढ़ाई पूरी करते हुए स्वरोजगार की तरफ कदम बढ़ा दिए। अब यह तीरंदाज मजबूरी में घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत करने का सिंडआरसेटी से तीस दिनों का प्रशिक्षण ले रही है।
अंजू का जन्म मध्यवर्गीय किसान परिवार में हुआ। अंजू के पिता कहते हैं कि बेटी धावक होती तो सबसे पहले उसके लिए अच्छे जूते लाकर देता। लेकिन बेटी ने तीरंदाजी के क्षेत्र में जाने की इच्छा दिखाई तो उसे तीर कमान लाकर दिया। मेरी बेटी ने मुझे निराश नहीं किया और कई स्टेट चैंपियनशिपों में गोल्ड, सिल्वर, ब्रांज मेडल और शील्ड जीतीं। तीरंदाजी में परिवार और प्रदेश का नाम रोशन करने पर उम्मीद थी कि यूपी सरकार नौकरी देकर अंजू का हौसला बढ़ाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकार की इस उपेक्षा पर अंजू ने हाथ का हुनर सीखकर पैरों पर खड़े होने का फैसला लिया।
सिंडआरसेटी संस्थान के निदेशक रविकांत के अनुसार अंजू का हौसला देखने के बाद लगाता है कि अब वह किसी भी प्रकार के घरेलू उपकरण रिपेयर कर आजीविका चला सकती है। संस्थान की माधुरी शर्मा के अनुसार ये जरूरी नहीं कि हर कमाने वाली लड़की डॉक्टर या शिक्षिका हो। वह खाना बना सकती है। पार्लर चला सकती है। कपड़े सिल सकती है। जरूरत हुनर को घर से बाहर लाने की है। ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर रमेश जोशी का कहना है कि हम अपने-अपने क्षेत्र मेें खास उपलब्धियां हासिल करने वालीं महिलाओं का उदाहरण देकर ट्रेनिंग लेने वालीं महिलाओं का उत्साह बढ़ाते हैं। क्योंकि हर काल में महिलाओं ने कुछ न कुछ लीक से हटकर किया है।
खास बातें:
तीरंदाजी में कमा चुकीं अंजू प्रदेश स्तर पर नाम, जीते मेडल, नहीं मिली सरकारी नौकरी
अब घरेलू विद्युत उपकरण रिपेयर करने का सिंडआरसेटी से ले रही 30 दिनों का प्रशिक्षण