भारी वाहन बंद होने से हादसों में आएगी कमी
मेरठ। शहर में भारी वाहनों की एंट्री बंद होने से जहां जाम की समस्या कम हो गई है, वहीं हादसों में भी कमी आएगी। ट्रैफिक पुलिस ने 25 दिसंबर की सुबह से शहर में नो एंट्री के समय दिन में भारी वाहनों को बंद कर दिया।
शहर में 15 मुख्य स्थान ऐसे थे जिनमें दिन में जाम की समस्या बनी रहती थी। शहर के चार प्रमुख चौराहे बेगमपुल चौराहा, रेलवे रोड चौराहा, हापुड़ अड्डा और गांधी आश्रम चौराहा ही ऐसे स्थान थे जिन पर नो एंट्री के समय भारी वाहन नहीं निकलते थे। लेकिन अन्य 11 स्थानों पर भारी वाहन दिन में बेलगाम दौड़ते थे। मामले में अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार इस साल एक जनवरी से 15 दिसंबर तक 987 सड़क हादसें हो चुके हैं। इस साल सड़क हादसों में 395 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 769 लोग घायल हुए। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि शहर में भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नो एंट्री के समय ट्रक से करीब 35 से 40 मौत हुई हैं।
भारी वाहनों से यहां होते थे हादसे
एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी ने बताया कि भारी वाहन बंद होने से हादसों में भी कमी आएगी। यातायात की समीक्षा में पिछले एक साल में जीरो माइल, कमिश्नरी आवास चौराहा, लालकुर्ती मेन रोड, विवि रोड, तेजगढ़ी चौराहा, हापुड़ रोड, पीवीएस रोड और मेडिकल कॉलेज के सामने, बागपत रोड पर ट्रक और अन्य भारी वाहनों से हुए हादसों में लोगों की जान जाती रही है। 25 दिसंबर से ट्रैफिक पुलिस ने शहर में नो एंट्री के समय भारी वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया था। दिल्ली रोड पर कोई भी भारी वाहन ट्रांसपोर्ट नगर गेट से बेगमपुल की तरफ नो एंट्री के समय नहीं जा सकेगा। बिजली बंबा तिराहे से सिर्फ टीपीनगर और मंडी गेट तक दोपहर 11 से एक बजे और तीन बजे से रात्रि आठ बजे तक प्रतिबंध किए गए हैं।
यहां जाम से भी मिल रही निजात
जीरो माइल चौराहा, लालकुर्ती में मेन रोड, बाउंड्री रोड, कमिश्नरी आवास चौराहा, विवि रोड, पीवीएस रोड, हापुड़ रोड और बागपत रोड के साथ जेलचुंगी चौराहे पर भी भारी वाहन दिन में बंद होने से जाम की समस्या कम हुई है।
शास्त्रीनगर में हुआ था भीषण हादसा
शास्त्रीनगर में पीवीएस रोड पर 25 मई 2017 को बेलगाम ट्रक से भीषण हादसा हुआ था। जिसमें छात्रा कनक की दर्दनाक मौत हो गई थी। छात्रा के दादा की भी जान गई थी। अब वहां भारी वाहन बंद होने से बड़ी राहत हुई है।
खास बात
भारी वाहनों के कारण होते हैं ज्यादातर हादसे, कई लोगों की जा चुकी है जान