छात्रों को यूनिफार्म वितरित
हस्तिनापुर। राजकीय इंटर कॉलेज में कक्षा छह, सात एवं आठ के बच्चों को शनिवार को निशुल्क यूनिफार्म का वितरण किया गया। कॉलेज के प्रधानाचार्य मुनीशपाल एवं पीटीए अध्यक्ष जयवीर सिंह ने कक्षा छह, सात एवं आठ के अनुसूचित जाति के छात्रों को दो सेट पेंट, शर्ट वितरित कीं। उन्होंने बताया सरकार द्वारा छात्रहित में चल रही सभी योजनाओं की जानकारी एवं उनका लाभ सभी पात्र छात्रों को दिया जा रहा है। यहां पर वीरसैन, मंगलसैन, नन्दलेश, सरित देव, सतेन्द्र कुमार आदि सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
गेहूं की बुआई समय पर करना जरूरी
हस्तिनापुर।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए गेहूं की फसल बहुत महत्वपूर्ण है। देश में खाद्यान्नों में गेहूं का प्रमुख स्थान है। किसान गेहूं की बुवाई धान की कटाई के बाद करते हैं। जिससे गेहूं की बुवाई में देरी से होने पर फसल कमजोर रह जाती है। इसका असर पर उपज पर पड़ता है। इसलिए धान की फसल की अगेती बुवाई करनी चाहिए। जिससे हर हाल में गेहूं बुवाई हेतु अक्टूबर में धान के खेत खाली हो जाएं और नवम्बर में गेहूं की फसल की बुवाई हो सके।
स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी डा. ओमवीर सिंह ने कृषकों को इस माह सबसे अधिक बोई जाने वाली गेहूं की उत्तम फसल उगाने की सलाह दी। डा. ओमवीर सिंह ने बताया कि गेहूं की बुवाई नवम्बर तथा विलम्ब से 25 दिसंबर से पूर्व अवश्य कर लेनी चाहिए। देर से बुवाई करने पर गेहूं की फसल तीन से चार कुंतल प्रति हेक्टेयर घट जाती है। धान कटाई के बाद मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई फिर दो बार डिस्क हैरो प्रयोग करें। इससे धान के ढूंढ छोटे टुकड़ों में कट जाते हैं। इन्हें सड़ाने हेतु 15-20 किलोग्राम नत्रजन यूरिया के रूप में प्रति हेक्टेयर खेत तैयार करते समय अवश्य देना चाहिए। उर्वरकों का प्रयोग भी मृदा परीक्षण के आधार पर करना चाहिए। समय से गेहूं बुवाई के लिए फसल चक्र में 150 किग्रा नाइट्रोजन 60 किग्रा, फास्फोरस एवं 40 किग्रा पोटाश की आवश्यकता होती है। नाइट्रोजन की आधी अथवा तिहाई फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा अंतिम जुताई के समय अथवा बुवाई के समय लाइनों में बीज से 2-3 सेमी. बगल से गहराई पर डालें। समय से बुवाई के लिए 100 किग्रा. एवं देर से बुवाई के लिए 125 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें। बीज बोने से पहले एक्सिल 2 डीएस, कार्बाक्सिम या पीएसबी से उपचारित करें। गेहूं की फसल में 4 से 6 सिंचाई की आवष्यकता होती है। प्रथम सिंचाई 20 से 25 दिन, दूसरी 40 से 45 दिन, तीसरी सिंचाई 60 से 65 दिन, चौथी सिंचाई फूल आने पर तथा पांचवी दाने में दूध पड़ने पर करनी चाहिए। अच्छी फसल के लिए गेहूं की उन्नत प्रजातियों का चयन करें और शुद्ध एवं प्रमाणित बीज का ही उपयोग करें। उन्होंने गेहूं की फसल बथुआ, आरजीमोन, कृष्णनील, प्याजी आदि खरपतवारेां के नियंत्रण और कीटों की जानकारी के साथ उन्हें नष्ट करने के उपाय भी बताए।
मुख्य बातें
देर से बुवाई करने पर गेहूं की फसल तीन से चार कुंतल प्रति हेक्टेयर घट जाती है