देख गयी टीम, मेडिकल में न बजट काफी और न डाक्टर
- मेडिकल की निरीक्षण रिपोर्ट तैयार, सुधार की है दरकार, केजीएमयू प्रोफेसर शासन को सौंपेंगे रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। लखनऊ की किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के प्रोफेसर डॉ. जीके सिंह और उनकी टीम ने दो दिन के निरीक्षण के बाद मंगलवार को मेरठ मेडिकल की रिपोर्ट तैयार कर ली है। रिपोर्ट में बजट का अभाव और स्टाफ की कमी सबसे बड़ी समस्या बताया गया है। इसकेअलावा स्टाफ में आपसी समन्वय का भी अभाव है। वे इस रिपोर्ट को शासन को सौंपेंगे।
केजीएमयू प्रोफेसर डॉ. जीके सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की चिकित्सीय व्यवस्थाओं का हाल 18 बिंदुओं पर जांचा गया है। उन्होंने जो रिपोर्ट तैयार की है, उसमें मेडिकल का बजट बढ़ाए जाने की जरूरत बताई है। बजट बढे़गा तो दवाओं और एक्सरे फिल्म आदि को लेकर मरीज परेशान नहीं होंगे। स्टाफ बढ़ाए जाने की बहुत जरूरत है। स्टाफ मानकों से काफी कम है। दिल और दिमाग केडॉक्टर नहीं हैं, छोटा स्टाफ भी काफी कम है। इस वजह से मरीजों को परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि हालांकि ऐसा नहीं है कि यहां के स्टाफ में सामर्थ्य नहीं है। यहां का स्टाफ काबिल और बेहतर काम करने वाला है। जरूरत है कि सभी मिलजुलकर और सही तरीके से काम करें। सही और समय पर फैसले लें। यहां फैसले लेने में डॉक्टर, स्टाफ देर करता है, जो बाद में परेशानी का सबब बन जाता है। जिम्मेदारियां इस तरह बंटी हुई होनी चाहिए कि अगर एक अधिकारी या डॉक्टर न हो तो दूसरा फैसले ले सके। यहां इसका अभाव है।
रिपोर्ट में ये दी गई है सलाह
1. सारी व्यवस्थाओं को ऑनलाइन किए जाने की जरूरत : व्यवस्थाओं को ऑनलाइन किए जाने की जरूरत है। एक क्लिक पर पता चल जाए कि यहां कितनी दवाइयां हैं, कितनी एक्सरे फिल्म।
2. वित्त विशेषज्ञ, कानूनविद् और प्रशासनिक अफसर हों : मेडिकल में वित्त विशेषज्ञ, कानूनविद् और प्रशासनिक व्यवस्था चलाने वाले अलग से रखे जाने चाहिएं। प्रोफेसर, डॉक्टर और अन्य स्टॉफ इन व्यवस्थाओं में उलझा रहेगा तो वह मरीजों की सेवा अच्छे से कैसे कर पाएगा।
3. सुरक्षा व्यवस्था की दरकार : मेडिकल में डॉक्टरों से मारपीट और अभद्रता के मामला गंभीर विषय है। मेडिकल की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होनी चाहिए।
4. पुरानी बिल्डिंग के दुरुस्त कराया जाए : मेडिकल की पुरानी बिल्डिंग की हालत ज्यादा बेहतर नहीं है। रिपोर्ट में इसे दुरुस्त किए जाने की जरूरत।
बढ़ेगा बजट, मिलेगा स्टाफ
अब उम्मीद जगी है कि मेडिकल अस्पताल की बिगड़ी व्यवस्था में कुछ सुधार होगा। यहां बजट और स्टाफ बढ़ेगा। यहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है और बजट सात करोड़ रुपये है, जबकि मेडिकल प्रबंधन 15 करोड़ की मांग कर रहा है। इसके अलावा डॉक्टरों और अन्य स्टाफ के 50 से ज्यादा पद खाली पड़े हैं।
स्टूडेंट्स से कहा, टेक्नोलॉजी का करें इस्तेमाल
मेरठ। निरीक्षण के दूसरे दिन मंगलवार को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के प्रोफेसर डॉ. जीके सिंह ने कॉलेज देखा। इसके बाद स्टूडेंट्स से मिले। पहले गर्ल्स हॉस्टल गए और फिर ब्वाय हॉस्टल। उन्होंने स्टूडेंट्स से कहा कि ज्ञान से जहां से भी मिले, उसे ग्रहण करें। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें। यू ट्यूब और अन्य माध्यमों से नॉलेज बढ़ाएं। उन्होंने प्रोफेसरों से भी कहा कि वे अपने लेक्चर रिकॉर्ड कर उसे यू ट्यूब या वेबसाइट पर डालें, ताकि भावी डॉक्टर उनसे सीख सकें।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
बजट का अभाव
आपसी समन्वय का भी अभाव
स्टाफ मानकों से काफी कम
दिल और दिमाग केडॉक्टर नहीं
जूनियर स्टाफ की कमी
डाक्टर और स्टाफ फैसले लेने में देरी करता है