मेरठ। यदि यह राह खुल गई तो विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान क्षेत्र में मेरठ एक चमकता सितारा बनकर उभर सकता है। उत्तर प्रदेश में पहले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजूकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) की स्थापना के लिए जमीन की तलाश मेरठ समेत मंडल के सभी जिलों में शुरू हो गई है। कहीं भी यदि जगह मिली तो इस पर काम शुरू हो सकता है।
देश के इस समय सात स्थानों पर भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान हैं। सभी जगह न केवल नए-नए शोध हो रहे हैं, बल्कि यहां प्रवेश पाने के लिए देश भर के साइंस स्टूडेंट दिन-रात एक किए रहते हैं। खासतौर पर यहां शैक्षिक कार्यक्रमों में पीएचडी, बीएस, एमएस, एकीकृत एमएस जैसे कोर्स होते हैं, तो वहीं विशेष अनुसंधान कार्यक्रम चलते हैं।
यह है उद्देश्य
दरअसल इन संस्थानों का मुख्य उद्देश्य ही भारत में विज्ञान अनुसंधान को बढ़ावा देना है। इस इंस्टीट्यूट में उच्च कोटि के वैज्ञानिक तैयार किए जाते हैं। यहां प्रवेश पाना भी किसी छात्र के लिए गौरव की बात मानी जाती है। भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा संचालित प्रत्येक आईआईएसईआर को प्रथम पांच वर्षों के वित्तीय परिव्यय के लिए 500 करोड़ रुपये दिए जाते हैं।
यहां है सात आईआईएसईआर
देश में फिलहाल उड़ीसा, मध्य प्रदेश, वेस्ट बंगाल, पंजाब, महाराष्ट्र, केरला और आंध्र प्रदेश में आईआईएसईआर संचालित किए जा रहे हैं।
अब यूपी की बारी
अब उत्तर प्रदेश की बारी है। केंद्र सरकार की हरी झंडी के बाद उत्तर प्रदेश में इस बाबत काम शुरू हुआ है। मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने इसके लिए मंडल के मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, गौतमबुद्घ नगर के जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। कहा है कि अपने यहां 200 से 250 एकड़ जमीन का चिन्हीकरण करें। जिस पर आईआईएसईआर स्थापित किया जा सके। यह काम 15 दिन के भीतर ही हो जाना चाहिए ताकि शासन को इसकी रिपोर्ट भेजी जा सके। खासतौर पर सरकारी जमीन का चयन हो।
बड़ी सफलता होगी
मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार का कहना है कि आईआईएसईआर स्थापना के लिए जमीन चयन की तलाश मंडल में शुरू की गई है। मैंने सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि उपयुक्त जमीन तलाश लें। वास्तव में यदि यह इंस्टीट्यूट यहां आ गया तो यह एक बड़ी सफलता होगी।
खास बात:
- उप्र में चल रही है इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजूकेशन एंड रिसर्च स्थापना की तैयारी
- मंडलायुक्त ने मंडल के सभी जिलाधिकारियों से कहा, 15 दिन में तलाशें 250 एकड़ जमीन
- यदि मेरठ में मंजूरी मिली तो विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान में बड़ा होगा नाम