हिंडन नदी कि किनारे बसे गांवों का पानी जहरीला हो गया है। खतरे को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने छह जिलों के 31 हजार हैंडपंपों को उखाड़ने का फरमान जारी किया है। लोगों को कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से बचाने के लिए यह फैसला लिया गया है। गांवों में पानी की व्यवस्था जल निगम को करनी होगी। गाजियाबाद से सहारनपुर तक के हालात खराब हैं।
हिंडन नदी के किनारे बसे गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर जनपद के करीब 154 गांवों का पानी प्रदूषित हो चुका है। यहां पर लगे हैंडपंप जहर उगल रहे हैं। इन गांवों का मामला जब एनजीटी के पास पहुंचा तो गांवों में लगे हैंडपंपों को चिह्नित कर इनके हैंडल उतारने के निर्देश दिए गए। लेकिन पानी की रिपोर्ट को देखते हुए एनटीजी ने गांवों के 31 हजार हैंडपंपों को उखाड़ने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने एक कमेटी का गठन भी किया है। यह कमेटी गांवों में हैंडपंपों पर कार्रवाई करेगी। एनजीटी ने 21 अक्तूबर से पहले सभी हैंडपंपों को उखाड़कर इन गांवों में पानी की व्यवस्था करने के निर्देश जारी किए हैं।
154 गांव प्रभावित
एनजीटी में दायर किए गए वाद में यह तथ्य दिए गए है कि हिंडन नदी के किनारे बसे 6 जनपदों के 154 गांवों का जल प्रदूषित हो गया है। जल प्रदूषित होने के कारण गांवों की स्थिति खराब है। बीमारियां फैल रही हैं। लोग कैंसर से मर रहे हैं।
हैंडपंपों में निकल रहे ये तत्व
हैंडपंप के पानी में हानिकारक तत्व मिल रहे हैं। इनमें लैंड, आयरन, क्रोमियम, कैडियम आदि निकल रहे हैं। पानी के माध्यम से ही यह तत्व शरीर के अंदर जाते हैं। लंबे समय तक पानी पीने के कारण इनसे कैंसर जैसी भयंकर बीमारियां हो जाती हैं।
जनपदों में हैंडपंपों की स्थिति
जनपद हैंडपंप
शामली 4000
मेरठ 7000
बागपत 10000
मुजफ्फरनगर 2500
गाजियाबाद 5000
सहारनपुर 2500