एक महीने में डाल दिया 57 करोड़ का रसायनिक खाद
बिजनौर। जैविक खादों के इस्तेमाल के लिए तमाम अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन किसानों का रासायनिक खादों के प्रति मोह कम नहीं हो रहा है। मार्च माह में गन्ना बुवाई में किसानों ने 57 करोड़ से अधिक का यूरिया व अन्य रासायनिक खाद खेतों में डाला है।
जिले में मार्च महीने में गन्ने की बुवाई सबसे ज्यादा होती है। मार्च में ही करीब 70 हजार हेक्टेयर जमीन में गन्ना बोया जा चुका है। सरकार किसानों को जैविक खेती करने और फसल चक्र अपनाने के लिए बहुत जागरूक कर रही है, लेकिन किसान गन्ने की खेती और यूरिया व अन्य रासायनिक खाद के प्रयोग कम नहीं कर रहे हैं। मार्च महीने में किसानों ने गन्ने के बीज के साथ यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी, एसएपी, जिंक व अन्य माइक्रोन्यूट्रेंट भारी संख्या में डाले हैं। इनकी कीमत 57 करोड़ से अधिक है। यानि हर रोज किसानों ने गन्ना बोते समय करीब दो करोड़ का रासायनिक खाद खेतों में डाला है। अगर किसान रासायनिक खाद के बजाए जैविक खाद की खेती करें तो यह सब पैसा केवल एक ही महीने में बचाया जा सकता था। (संवाद)
खाद मात्रा कीमत कुल कीमत
यूरिया 278350 266.5 126092550
डीएपी 135790 1200 325896000
एनपीके 44410 1185 105251700
एमओपी 4890 850 8313000
एसएसपी 4080 550 4488000
जिंक 70 80 560000
माइक्रोन्यूटैंट 40 40 160000
नोट : खाद की मात्रा क्विंटल में है। जिंक व माइक्रोन्यूट्रेंट के दाम प्रति किलो और बाकी के दाम 50 किलोग्राम की बोरी के हैं।
ऐसे तो जीरो बजट खेती का सपना नहीं हो पाएगा पूरा
किसानों को जैविक खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है। जीरो बजट खेती भी कहा जा रहा हैं। इसमें रासायनिक खाद का खर्च शून्य रहता है। साथ ही खेतों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए भी कई जैविक खाद बाजार में आ रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह के अनुसार किसानों को जैविक खेती के लिए जागरूक होना पड़ेगा। जैविक खेती ही भविष्य है। किसानों को जैविक खेती की ओर अधिक से अधिक रुख करना चाहिए।
-कुछ किसानों को गन्ने की जैविक खेती से जोड़ा गया है। जीरो बजट खेती से ही किसानों की आय बढे़गी और मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढे़गी - यशपाल सिंह, जिला गन्ना अधिकारी।