गुजरात, अंबिकापुर और दिल्ली के कूड़ा निस्तारण मॉडल देखने में गुजरा साल
शहर में कूड़े के हालात जस की तस, शासन-प्रशासन के बीच फुटबाल बनी योजना
मेरठ। शासन और प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद शहर में कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। मंगतपुरम, लोहियानगर और गांवड़ी डंपिंग ग्राउंड पर दिनोंदिन कूड़े के पहाड़ बड़े होते जा रहे हैं। तीन साल पहले दिखाया गया गांवड़ी में कूड़ा निस्तारण प्लांट का सपना आज तक सपना ही है। इतना ही नहीं कूड़ा निस्तारण प्लांट के मॉडल देखने के लिए निगम अधिकारियों ने खूब सैर सपाटा किया। लेकिन न तो अंबिकापुर मॉडल ही लांच हो सका और न गुजरात मॉडल। शहर में कूड़े की स्थिति जस की तस है।
शहर से प्रतिदिन एक हजार मीट्रिक टन कूड़ा निकल रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार ने कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने व पुराने कूड़े के ढेरों को निस्तारित कराने का आदेश दिया। इतना ही नहीं स्वच्छता के लिए सरकार ने भरपूर खर्च किया। लेकिन शहर में कूड़े की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया। इसके पीछे नगर निगम की लापरवाही ही सामने आ रही है।
अंबिकापुर मॉडल देखने पहुंचे निगम अधिकारी
देश का अंबिकापुर शहर सबसे स्वच्छ शहरों में से एक है। यहां पर कूड़ा घर-घर से लिया जाता है। शहर में कहीं पर भी कूड़ा नहीं मिलेगा। अलग अलग लिए जाने वाले कूड़े से वर्मी कंपोस्ट, ईंट आदि बनाई जाती है। अंबिकापुर मॉडल देखने के लिए नगर निगम के अधिकारियों के साथ भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी पहुंचे थे। काफी प्रयास के बाद भी शहर में यह मॉडल लागू नहीं हो पाया।
गुजरात में भी देखा कूड़ा निस्तारण
नगर निगम के अधिकारी कूड़ा निस्तारण प्लांट देखने के लिए गुजरात का भी दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा दिल्ली में भी कूड़े की पहाड़ी पर विकसित पार्क को देखा। नगर निगम के एक दो अधिकारी नहीं बल्कि पूरी बस भरकर दिल्ली गए थे। लेकिन कूड़ा निस्तारण प्लांट का मॉडल आज तक नहीं आया है।
मंगतपुरम में कूड़े का पहाड़
दिल्ली रोड पर बस्ती के बीच में मंगतपुरम में कूड़े का पहाड़ है। कूड़े के पहाड़ को बायोकेपिंग के माध्यम से निस्तारित करने का सपना दिखाया गया। कंपनियों को भी आमंत्रित किया। लेकिन निगम के अधिकारियों की उनसे बात नहीं बन पायी। अब तो निगम के अधिकारी कूड़ा निस्तारण को भूल ही गए हैं।
स्वच्छता सर्वेक्षण में निगम फेल
भारत सरकार की ओर से चलाए गए स्वच्छता सर्वेक्षण में भी नगर निगम की बार बार किरकिरी हो रही है। सफाई के बिंदु पर नगर निगम को अंक ही नहीं मिल पा रहे हैं।
वर्जन
हमारे बोर्ड का जब से गठन हुआ है। उससे पहले से ही हम कूड़ा निस्तारण प्लांट की बात सुनते चले आ रहे हैं। यह सब काम अधिकारियों की मंशा पर निर्भर है। निगम अधिकारी चाहते ही नहीं कि शहर कूड़े से मुक्त हो। पता नहीं क्यों कूड़ा निस्तारित करने वाली कंपनी का चयन नहीं हो पा रहा है। - सुनीता वर्मा, महापौर।
हमने कूड़ा निस्तारण पर काफी काम करने का प्रयास किया है। गांवड़ी में कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने के लिए सरकार ने कंपनी का चयन कर लिया है। कंपनी को निर्देश भी दिया जा चुका है। जो कंपनियां निगम आयी थीं, वह कागजी कार्रवाई में जुटी हैं।
-मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त