राष्ट्रोदय पर सभी दलों की निगाह
मेरठ। मेरठ में होने जा रहे आरएसएस के राष्ट्रोदय समागम पर सभी दलों की पैनी निगाह है। खास तौर पर बहुजन समाज पार्टी ने गांवों तक में अपनी टीम खड़ी की है। कारण, राष्ट्रोदय का बड़ा मकसद सामाजिक सरसता का संदेश देते हुए खास तौर पर दलितों को संघ से जोड़ना है। ऐसे में बसपा आला कमान ने कहा है कि टीम लगाकर देखो कि कितने दलित इस कार्यक्रम से जुड़ रहे हैं। संघ की इस सोशल इंजीनियरिंग से अन्य दलों के होश उड़े हैं।
आरएसएस मेरठ प्रांत के 10580 गांवों, 1553 बस्तियां और 400 उप बस्तियाें का बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। मेरठ के 14 जिलों के स्वयं सेवक इसमें हिस्सा लेंगे। अहम बात यह है कि इस समागम का पूरा फोकस है सभी जाति, धर्म, संप्रदाय केलोगों को एक साथ इकट्ठा करना। खास तौर पर दलितों को आरएसएस के साथ लाना। उन्हें शाखाओं से जोड़ना। आरएसएस ने जिस तरह से राष्ट्रोदय का प्रचार किया है उसमें भी इस बात का खास ख्याल रखा है। अधिकतर बैनर होर्डिंग में यह मैसेज देने की कोशिश की है कि राष्ट्र की प्रगति में सभी जातियों के लोगों ने बराबर की भागीदारी की। भगवान राम के साथ शबरी, महर्षि वाल्मीकि, संत रविदास, चौखामैला आदि संतों महापुरुषों पर फोकस किया गया है। संघ का लक्ष्य पूरी तरह से है कि इस वर्ग को इसी तरह से संघ में समाहित कर दिया जाए जैसे अन्य सेवक या अन्य लोग।
जिस तरह से छह लाख घरों से भोजन इकट्ठा किया गया है उसका भी मूल उद्देश्य यही है। संदेश यह दिया जा रहा है कि चाहे दलित हो या सवर्ण एक साथ भोजन करेंगे। सभी के घरों का भोजन मिश्रित होगा। दलितों के यहां से आया भोजन एक साथ मिक्स कर परोसा जाएगा। होर्डिंग पर भी यही संदेश देते हुए भगवान राम को शबरी के हाथों से बेर खाते दिखाया गया है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को भी बड़े होर्डिंग पर मुख्य रूप से स्थान दिया गया है।
बाकी दलों में हो रही बेचैनी
आरएसएस का यही दांव कई राजनीतिक दलों को बेचैन किए है। खासतौर पर बहुजन समाज पार्टी इसे लेकर बेहद सक्रिय है। सभी कोऑर्डिनेटरों को कहा गया है वह इस पर निगाह रखें। बसपा इसे लोकसभा चुनाव से जोड़कर देख रही है। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में यह वर्ग बसपा से छिटक गया था। इसका परिणाम रहा कि बसपा का यूपी से सूपड़ा ही साफ हो गया। बसपाइयों को यह चिंता खाए जा रही है कि कहीं विचारधारा के आधार पर दलित आरएसएस से जुड़ गए तो आगे की राह मुश्किल होगी। उधर, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के दिग्गज भी इस पर निगाह लगाए हैं।
अन्य दलों के लोग भी हो रहे शामिल
भाजपा के अलावा अन्य दलों के लोगों ने भी राष्ट्रोदय के लिए रजिस्ट्रेेशन कराएं हैं। वे कार्यक्रम में शामिल हाेंगे। यह भांपने के लिए कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है और आरएसएस किस तरह से अपनी विचारधारा का प्रसार कर रहा है। इसके भविष्य में क्या परिणाम होंगे।