कृष्णा पर चेकडेम से भूजल बना ’जहर’
बागपत। भूजल की सतह ऊंची उठाने के लिए बनाए गए चेकडेम ही खतरा बन गए हैं। कृष्णा नदी में बह रहा गंदा पानी चेकडेम पर तालाब सा बन जाता है, यहीं से यह पानी धरती की सतह में समाता है। नुकसान यह हुआ कि नदी किनारे बसे गांव तक इस प्रदूषित जल का असर पहुंचा। हैंडपंपों के जरिए यह पानी लोगों के घरों तक पहुंचा और बीमारियां परोस रहा है। एक या दो नहीं बल्कि जिले के करीब 30 गांव ऐसे हैं, जिनमें प्रदूषित जले के कारण बीमारियों का असर है। बागपत के गांव सूजती, कंडेरा, रंछाड़ और बरनावा गांवों में चेकडेम बनाए गए हैं।
क्या यह रही वजह
सहारनपुर और शामली जिले की फैक्ट्रियों से बगैर ट्रीटमेंट के छोड़े जा रहे जहरीले पानी ने कृष्णा नदी का जल जहरीला कर दिया है। चेकडेम के कारण करीब एक सौ फुट की गहराई तक का भूजल को दूषित हो चुका है।
यह गांव चपेट में
कृष्णा नदी के किनारे बूढ़पुर, सूजती, गांगनौली, भगवानपुर नांगल, असारा, कंडेरा, बामनौली, रंछाड़ और बरनावा समेत अन्य गांव प्रदूषित भूजल की चपेट में हैं।
दिव्यांगता बढ़ी, हारने लगी जिंदगी
प्रदूषित जले के कारण कैंसर से मरने वाली की संख्या एक सौ के पार है। यही नहीं पेट और त्वचा की बीमारियों से ग्रामीण ग्रसित है। सबसे ज्यादा मामले दिव्यांगता के सामने आए हैं। प्रदूषित जले के कारण दिव्यांग हुए लोग खुद एनजीटी पहुंचकर अपना पक्ष रख चुके हैं।
यह है ग्रामीणों का दर्द
गांगनौली निवासी गुरुशरण राठी कहते हैं कि कृष्णा नदी में बने चेकडैम के कारण भी जल प्रदूषित हो रहा है। इन चेकडेम को तुड़वाया जाए और नदी में साफ पानी छुड़वाया जाए। संजीव कुमार का कहना है कि कृष्णा में बह रहे प्रदूषित जल के कारण लोग मर रहे है, लेकिन शासन - प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। प्रवेंद्र राठी और सतेंद्र राठी का कहना है कि कृष्णा नदी इस क्षेत्र के लिए काल बन गई है।
मंत्री ने स्वीकारा 132 गांव प्रदूषित
केंद्रीय मानव संसाधन एवं नदी विकास मंत्री डॉ सत्यपाल सिंह स्वीकार करते हैं कि सहारनपुर से नोएडा तक 132 गांव का पेयजल हिंडन, कृष्णा और काली नदी के कारण प्रदूषित है। लोग बीमारियों की चपेट में है। केंद्र सरकार जल को स्वच्छ करने के प्रयास में जुटी है और इसके लिए विशेष योजनाएं तैयार की जा रही है।
एनजीटी का सख्त रवैया
दोआबा पर्यावरण समिति के चेयरमैन डॉ चंद्रवीर सिंह बताते हैं कि प्रदूषित जल का प्रवाह और बीमारियों की रोकथाम के लिए एनजीटी ने यूपी सरकार को विशेष कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं। यह करीब 316 फैक्ट्रियों की जांच करेगी। सरकार को अपना पक्ष 12 मार्च को एनजीटी के समक्ष रखना होगा।