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चुनाव के चलते आयी भूमाफियाओं की मौज

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चुनाव के चलते आई भूमाफियाओं की मौज
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मेरठ। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के अभियान पर इन दिनों ब्रेक लगा है। अधिकारी इसका कारण नगर निगम चुनाव बता रहे हैं। ऐसे में अधिकांश भूमाफिया अपने बचाव के रास्ते तलाशने में लगे हुए हैं।
जनपद में सरकारी जमीनों पर बड़े कब्जे हैं। इसमें नगर निगम, एमडीए, जिला पंचायत, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, वक्फ आदि के साथ ही नजूल की संपत्ति का बड़ा क्षेत्रफल है। इन तमाम जमीनों का रिकॉर्ड धीरे धीरे प्रशासन और अन्य विभाग खंगाल रहे हैं। एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स गठित होने के बाद सरकारी जमीनों पर हुए कब्जे का रिकॉर्ड भी तैयार हुआ और उसे मुक्त कराने के लिए अभियान भी इक्का दुक्का जगह चलाया गया। जबकि अधिकांश को नोटिस जारी किए गए।
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लेकिन करीब दो माह सक्रिय रूप से चले इस अभियान पर अचानक ब्रेक लग गया। अभियान जब रुका तो चर्चा हुई कि नगर निगम चुनाव के कारण भाजपाइयों की सिफारिश पर शासन स्तर से ही अभियान को स्थगित करने का इशारा मिला है। लेकिन इन दिनाें तमाम अधिकारी चुनाव में पूरी तरह व्यस्त हो चल रहे हैं। ऐसे में भूमाफियाओं के खिलाफ अभियान पूरी तरह रुका हुआ है।
कार्रवाई के इंतजार में ये हैं प्रमुख मामले
हापुड़ रोड पर गुलमर्ग सिनेमा के पास स्थित होटल हाजी सईद नजूल की जमीन पर बना है। इसके आसपास के करीब 9 निर्माण भी नजूल की भूमि पर हैं। जिनकी जांच शुरू हुई, लेकिन अचानक उस पर ब्रेक लग गया। इसी तरह इसी के पास ही सरकारी जमीन पर बंटवारे के दौरान पाकिस्तान से विस्थापित होकर आये लोगों के लिए बनाये गये शौचालयों की जगह अब आवास निर्माण के मामले पर भी जांच शुरू हुई, लेकिन यह भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई। एनएच-58 पर एक बड़े शिक्षण संस्थान द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला भी इसी तरह जांच शुरू होने के साथ फिलहाल फाइलों में दबा हुआ है। वहीं वन विभाग की करीब 700 बीघा जमीन को कब्जा मुक्त कराने का प्रकरण भी चुनाव के चलते ठंडे बस्ते में है।

कोर्ट से राहत की फिराक में भूमाफिया
प्रशासन द्वारा सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वाले भूमाफियाओं को नोटिस जारी किया गया था। इनका जवाब अभी तक किसी ने नहीं दिया है। लेकिन चुनाव के कारण कार्रवाई टलने के बाद इसी नोटिस को आधार बनाकर अधिकांश भूमाफिया कोर्ट की शरण में जाने लगे हैं, जहां से किसी भी तरह राहत मिलने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
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नगर निकाय चुनाव की व्यस्तता के कारण कुछ प्रकरण स्थगित हैं। लेकिन चुनाव बाद इन पर तेजी से काम होगा। यदि किसी मामले में कोर्ट से कोई आदेश भी आता है तो उसका परीक्षण कराकर कार्रवाई तय की जाएगी। लेकिन किसी भी भूमाफिया को बख्शा नहीं जाएगा। सत्यप्रकाश पटेल, अपर जिलाधिकारी प्रशासन

खास बात
नगर निकाय चुनाव के कारण निष्क्रिय हुई एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स
समय मिलने के कारण के भूमाफिया भी कोर्ट से राहत लेने की फिराक में
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