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बुद्घ विहार को तोड़ने का निशान लगाने का विरोध

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मेरठ। बौद्ध भिक्षुओं से कुछ अधिकारियों द्वारा बुद्ध विहार एवं डा. अंबेडकर प्रतिमा स्वयं तोड़ने के लिए कहे जाने का भारतीय मूल निवासी संगठन ने विरोध जताया। इसको लेकर संगठन के बैनर तले लोगों ने सोमवार को कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया।
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प्रदर्शनकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 58 स्थित दायमपुर में बुद्ध विहार एवं डा. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा वर्ष 1991 से स्थापित हैं। यहां 26 वर्षों से राष्ट्रीय पर्व, डा. अम्बेडकर जयंती एवं बुद्ध पूर्णिमा आदि मनाए जाते हैं। इस मार्ग के चौड़ीकरण के संबंध में संबंधित विभाग की टीम नोडल अधिकारी के नेतृत्व में बुद्ध विहार का निरीक्षण करने पहुंची थी। जिसने बुद्ध विहार समिति को पीछे स्थित सरकारी जमीन पर बुद्ध विहार एवं डा. अंबेडकर प्रतिमा का निर्माण कराकर समिति को हस्तगत कराने का आश्वासन दिया था। संगठन के जिलाध्यक्ष उपेंद्र गौतम ने बताया कि टीम के इस प्रस्ताव पर समिति ने सहमति जताई थी, लेकिन बीती पांच सितंबर को कुछ अधिकारी बुद्ध विहार पहुंचे। वहां ठहरे बौद्ध भिक्षुओं से बुद्ध विहार एवं डा. अंबेडकर प्रतिमा स्वयं तोड़ने का मौखिक आदेश दिया। इतना ही नहीं बुद्ध विहार को तोड़ने का निशान लगा दिया।
जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने यह भी धमकी दी कि यदि 11 सितंबर तक बुद्ध विहार को स्वयं नहीं तोड़ा गया तो उसे बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया जाएगा। प्रशासन की इस धमकी से बौद्ध समाज में आक्रोश है। संगठन ने मांग की कि बुद्ध विहार एवं डा. अंबेडकर की प्रतिमा को यहां से नहीं हटाया जाए। इस आश्य का एक ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन को सौंपा। इस दौरान संगठन के सुनील गौतम, वीरेंद्र सिंह बौद्ध, मोतीलाल, चंदकिरण जाटव, राहुल गौतम, अमर जाटव, राजकुमार, कविता, सुमित बौद्ध, रोहताश जाटव, राजन, महेश, जगदीश बौद्ध आदि रहे।
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मुख्य बातें
भारतीय मूल निवासी संगठन ने किया प्रदर्शन
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