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हस्तिनापुर में पर्यूषण महापर्व पर किया शांति विधान

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आत्म शुद्धि करने के लिए करें तप
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पर्यूषण महापर्व पर श्री दिगम्बर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में तीनलोक महामंडल विधान
हस्तिनापुर।
पर्यूषण महापर्व पर श्री दिगम्बर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे तीनलोक महामंडल विधान का शुभारंभ ओमकार की ध्वनि के साथ हुआ। शुक्रवार को शांतिधारा का सौभाग्य सुशील कुमार जैन व राजरानी जैन को प्राप्त हुआ। शान्तिधारा में महेश चंद जैन ने सहयोग किया। पूजन के बाद श्रीशान्तिनाथ, श्रीमल्लिनाथ, सोलोकारण पूजन एवं दसलक्षण पूजन किया गया।
पर्व के सातवें दिन मुनि श्री 108 भाव भूषण जी महाराज ने तप धर्म पर प्रवचन किया। उन्होंने कहा कि तप के माध्यम से कर्मों की निर्जरा होती है। तप से आत्म शुद्धि होती है। सोने को भी सोलह ताप देकर शुद्ध किया जाता है। उसी प्रकार से हमारे अन्दर भी क्रोध, मान, माया, लोभ, ईर्ष्या, द्वेष एवं अष्ट कर्म रूपी कर्म किट्टकाएं जमी हैं। इन कर्म किट्टकाओं को तप रूपी शोधन से हटाया जा सकता है।
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शाम को आर्यिका 105 भरतेश्वरी माताजी ने प्रवचन में कहा कि इच्छाओं को रोकना ही तप कहलाता है। उन्होंने तप के बारह भेद बताए। जो संसार के दु:खों से बचाकर जीव को उत्तम सुख प्राप्त कराएं। जैन धर्म एक महान प्राचीन धर्म है। मनुष्य योनि में जन्म लेने के बाद जैन कुल मिलना अपार सौभाग्य की बात है। संगीतमय महाआरती, भक्ति, सांस्कृतिक प्रतियोगिता के पुरस्कार सुषमा जैन, विनोद जैन खतौली एवं गीता जैन ने दिए। अनेकान्त विनोद ग्रुप की संगीत की मधुर लहरों पर गुरूकुल के बच्चों ने नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष हेमचन्द जैन सर्राफ, मंत्री प्रद्युमन कुमार जैन, मंत्री शिखरचन्द जैन मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुकेश जैन महाप्रबंधक, अशोक जैन, उमेश जैन, कमल जैन, अतुल जैन, मणिचन्द जैन आदि का सहयोग रहा।
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