50 लाख रुपये पानी में बहे, अब नए पेड़ों से आस
मेरठ। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के रास्ते में आ रहे पेड़ों को जिंदा रखने के लिए अनोखी तकनीक लाई गई थी। पेड़ों को शिफ्ट तो किया, लेकिन वे अब सूखने लगे हैं। इससे एनएचएआई के प्लान को तगड़ा झटका लगा। बचे हुए पेड़ भी सूखने की कगार पर हैं। इनसे 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। अब सवा सौ के करीब पेड़ों को शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है।
डासना से मेरठ 32 किलोमीटर के हिस्से में अच्छरौंड़ा और काशी गांव में आम के बाग को काटा गया था। इसमें लगभग 250 आम के पेड़ थे। इन पेड़ों को ट्री प्लांटर मशीन से निकालकर किनारे लगाया गया था। कुछ समय तक इनमें कोपलें फूटीं, लेकिन फंगस लगने के कारण अब ये पेड़ सूखने लगे हैं। अमर उजाला ने एक सप्ताह पहले भी इन पेड़ों के सूखने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद भी एनएचएआई ने सबक नहीं लिया। अब एक बार फिर वन विभाग के सहयोग से परतारपुर तिराहे से 123 पेड़ों को संजय वन में शिफ्ट करने की तैयारी है। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार एक पेड़ को शिफ्ट करने में 15 से 20 हजार रुपये तक का खर्च आया था। एक्सप्रेस-वे के लिए पहले चरण में 250 पेड़ पर खर्च किए गए 50 लाख रुपये पानी में बह गए। हालांकि, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के प्रोजेक्ट मैनेजर अरविंद कुमार का कहना है कि पेड़ों को शिफ्ट करने का बजट सरकार की तरफ से तय नहीं था और न ही इसका जिक्र एक्सप्रेस-वे का निर्माण कर रही जीआर इंफ्रा कंपनी के टेंडर में शामिल था।
जीआर इंफ्रा ने शुरू की थी पहल
इन पेड़ों को शिफ्ट करने की पहल खुद जीआर इंफ्रा ने शुरू की थी। एक्सप्रेस-वे के रास्ते को साफ करने के लिए एक हजार पेड़ों को वन विभाग की ओर से काट दिया गया, लेकिन 250 पेड़ों को बचाने के लिए ट्री प्लांटर मशीन का उपयोग किया गया। मशीन की सहायता से 6-7 फीट गड्ढा खोदा जाता है। इसके बाद पानी डालकर उस स्थान को गीला किया जाता है। ट्री प्लांटर मशीन की सहायता से ही पेड़ की शाखाओं को काटा जाता है। एक पेड़ को शिफ्ट करने में एक-दो घंटे का समय लगता है।
अब पीपल, पिलखन, अर्जुन को कर रहे शिफ्ट
परतापुर तिराहे से 700 मीटर मोदीपुरम की तरफ पीपल, पिलखन, अर्जुन के पेड़ों को शिफ्ट किया जा रहा है। इस कार्य को पूरा करने के लिए 5 मजदूर और दो जेसीबी मशीनें लगी हुई हैं।
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मिलेगी कामयाबी
आम के बड़े पेड़ शिफ्ट किए जाने पर वे हरेभरे नहीं रहते हैं। इसके अलावा उनको गर्मी में शिफ्ट किया गया। ऐसे में उनका मुरझाना स्वाभाविक था। लेकिन जिन पेड़ों के पत्तों से दूध निकलता है, उनको कटिंग करने पर दूसरी जगह शिफ्ट करने पर वे हरेभरे रहते हैं। पिलखन और पीपल भी ऐसे ही पेड़ों में आते हैं। इनकी उम्र सात साल के करीब है। दूसरा बरसात का मौसम इसके लिए और भी उपयुक्त है। संजय वन में इनकी हम पूरी देखरेख करेंगे। ये प्रयोग 80 फीसदी कामयाब रहेगा। -अदिति शर्मा डीएफओ
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हर पेड़ को नहीं कर सकते ट्रांसप्लांट
आम के पेड़ को आप ट्रांसप्लांट नहीं कर सकते हैं। पीपल और पिलखन जैसे कम उम्र के पेड़ों को तकनीक से ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने में सबसे अहम भूमिका मौसम की रहती है। जोकि अब बहुत उपयुक्त है। दूसरा जहां पर उनको लगाया जा रहा है, यदि वहां पहले से पेड़ों की संख्या अधिक है तो ऐसे वातावरण में वे पहले की तरह हरेभरे रहेंगे। -डॉ. दीप्ति शर्मा, बॉटनी विभाग एनएएस कॉलेज