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जानिए, नोटबंदी के बीते 50 दिनों में शहर और गांवों की क्या हालत रही ?

Thu, 29 Dec 2016 12:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के इन पचास दिनों में पब्लिक को खूब परेशानी झेलनी पड़ी। देहात क्षेत्र में हालत बहुत खराब रही। लोग अपने ही खाते से कैश निकालने को तरस गए। इस दौरान छह लोगों की मौत हो गई। एटीएम खाली होने के लोग इधर से उधर भटकते रहे। व्यापारियों को काफी नुकसान झेलना पड़ा। उधर, सरकार ने भी कैश लेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने को पूरी ताकत झोंक दी। लेकिन कैश की किल्लत से अभी भी लोगों की जरूरत पूरी नहीं हो रही हैं। काफी फजीहत के बाद सिस्टम पटरी पर आने की उम्मीद जगी है।
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आधिकारिक तौर पर नोटबंदी के बाद 10 दिनों में ही जिले के बैंकों में 3665 करोड़ रुपया जमा हुआ था, जबकि निकासी सिर्फ 265 करोड़ थी। हालांकि इसके बाद कोई भी आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं हुआ। लेकिन अनुमान है कि इन 50 दिनों में करीब 750 करोड़ के आसपास नगदी बैंक में जमा हुई है, जबकि निकासी 300 करोड़ के आसपास है।
 

खूब हुए हंगामे, तोड़फोड़

एटीएम के बाहर हंगामा करते लोग
नोटबंदी के बाद शुरू के 15 दिन बैंकों में पुराने नोट जमा कराने के लिए आपाधापी मची। लेकिन इसके बाद रुपये निकालने वालों की भीड़ बढ़ गई। बैंक के पास करेंसी कम थी और ग्राहक अधिक। कई-कई दिन बैंकों में कैश नहीं आया। लिमिट के मुताबिक भी लोगों को रकम नहीं मिली। कहीं दो तो कहीं चार हजार रुपये मिले। बैंकों में खूब हंगामे और तोड़फोड़ हुई। कई मुकदमे भी दर्ज हुए।

छह लोगों की हो गई मौत
नोटबंदी के बाद से लोगों को कई परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। बैंक की लाइनों में घंटों तक लगना और पर्याप्त कैश न मिलने की वजह से जिले में अलग-अलग स्थानों पर छह लोगों की मौत हो गई। किला रोड पर बसंत विहार कॉलोनी में तो बेटी की शादी के लिए कैश न मिलने से दुखी एक रिटायर सरकारी कर्मी ने खुद पर केरोसिन उड़ेलकर आत्मदाह करने की कोशिश तक की।

नियम शर्तों में ही उलझकर रह गए

नोटबंदी से परेशानी में जनता
नोटबंदी के बाद आरबीआई और सरकार के नियम कायदे लोगों पर भारी पडे़। शादी के लिए ढाई लाख की रकम लेने को लगाई गई सख्त शर्तों को लोग पूरी नहीं कर सके। पांच हजार से अधिक के पुराने नोट जमा करने पर बैंकों में इंटरव्यू और पूछताछ का काफी विरोध हुआ। यही वजह रही कि इन 50 दिनों में सरकार ने कई बार नियम शर्तों में फेरबदल किया।

व्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर

व्यवस्था सुधरने लगी
बैंकों ने टोकन व्यवस्था लागू कर अपने यहां भीड़ और आपाधापी को कुछ हद तक नियंत्रित कर लिया। कैश की दिक्कत भी धीरे-धीरे कम हो रही है, हालांकि अभी भी लोगों को लिमिट के अनुसार कैश नहीं मिल पा रहा है। बचत खाताधारक को 10 हजार और चालू खाताधारक को 30 हजार रुपये तक मिल रहे हैं। हालांकि आरबीआई से मांग के अनुसार पर्याप्त कैश न मिलने से यह समस्या अभी कुछ दिन और बने रहने की संभावना है।
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लॉकर से मिले करोड़ों, बैंकों पर उठे सवाल

लॉकर से मिले करोड़ों
नोटबंदी के बाद सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके जैन के सरकारी आवास और बैंक लॉकर्स करोड़ों के पुराने और नए नोट मिले। सिविल लाइन क्षेत्र में चार लोगों से पुलिस ने 8.80 रुपये के दो हजार के नए नोट बरामद किए। जिससे ये संभावना बढ़ गई कि जिले में भी काले धन का कारोबार चल रहा है। नए नोट लोगों पर कैसे आए, इसे लेकर बैंकों की विश्वसनीयता भी संदेह के दायरे में आई।

नोट बंदी के 50 दिन
घोषणा                                   आठ नवंबर  
बैंकों में आपाधापी की शुरूआत        10 नवंबर से
कुल जमा -                             7500 करोड़ (अनुमानित)
निकासी   -                             300 करोड़ (अनुमानित)
नोटबंदी की वजह से मौत का दावा      छह
कुल बैंक                                   440
एटीएम                                      390 
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