घंटाघर स्थित मेनका सिनेमा हॉल के मामले में बृहस्पतिवार को बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। मेनका सिनेमा पांच करोड़ रुपये में बैंक ऑफ महाराष्ट्र दिल्ली के पास गिरवी रखा हुआ है। इसके बावजूद फर्जी तरीके से शपथपत्र और कागजात तैयार कराकर सिनेमा की बिल्डिंग का ध्वस्तीकरण कराया गया। अब सिनेमा हॉल की जमीन पर होने वाले फर्जीवाडे़ की परतें खुलने लगी हैं। बैंक के अलावा एमडीए ने भी मेनका सिनेमा पर सील लगा दी है।
दरअसल मेनका सिनेमा की बिल्डिंग को अवैध तरीके से तोड़कर कांपलेक्स बनाने की तैयारी चल रही थी। इसका खुलासा ‘अमर उजाला’ ने किया तो पुलिस-प्रशासन में खलबली मच गई थी। गलत तरीके से दी गई एनओसी अपर नगरायुक्त ने निरस्त कर हाईटेक सिटी डेवलपर्स के डायरेक्टर पुरुषोत्तम चौबे के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया था। बृहस्पतिवार को मेरठ विकास प्राधिकरण ने मेनका सिनेमा पर सील लगा दी। नोटिस चस्पा करते हुए इस बिल्डिंग में कोई ध्वस्तीकरण या निर्माण पर रोक लगा दी।
बैंक की टीम पहुंचते ही मची खलबली
मेनका सिनेमा की संपत्ति साल 2016 से बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा नई दिल्ली के पास पांच करोड़ में गिरवी रखी है। जय अंबे बिल्डिंग मैटेरियल कंपनी ने मेनका सिनेमा को अपना बताकर कागज बैंक के पास रखे हैं। अब ध्वस्तीकरण की जानकारी लगते ही दिल्ली से बैंक ऑफ महाराष्ट्र की चीफ मैनेजर सोनी ठाकुर टीम के साथ बृहस्पतिवार को डीएम और एसएसपी से मिलीं। दोनों अधिकारियों को बैंक द्वारा लोन की बात बताई। अधिकारियों ने बैंक टीम के साथ देहली गेट पुलिस को मेनका सिनेमा हॉल पर भेजकर नोटिस लगवा दिया।
अलकरीम का मालिक पहुंचा
बैंक की टीम पहुंचते ही अलकरीम होटल का मालिक नासिर भी मेनका सिनेमा पर पहुंचा। नोटिस लगवाने के बाद बैंक की टीम को होटल मालिक अपने घर पर ले गया। जहां करीब 10 मिनट उनकी बात हुई। पुलिस ने बताया कि मेनका सिनेमा की बिल्डिंग का ध्वस्तीकरण अलकरीम होटल का मालिक ही करा रहा था। ध्वस्तीकरण में सारे कागज फर्जी मिले हैं। इसका मुकदमा देहली गेट थाने में दर्ज है। जिसकी विवेचना एसएसआई दिलशाद अहमद को दी गई है।
प्रॉपर्टी बैंक की, बतायी अपनी
मेनका सिनेमा की प्रापर्टी साल 2016 से बैंक ऑफ महाराष्ट्र की है। लेकिन हाईटेक सिटी डेवलपर्स के डायरेक्टर पुरुषोत्तम चौबे के नाम से एनओसी लेकर ध्वस्तीकरण कराया गया, जबकि पुरुषोत्तम चौबे इस कंपनी को वर्ष 2010 में छोड़कर जा चुके हैं। इस कंपनी के डायरेक्टर रमाकांत पांडेय को दर्शाकर वर्ष 2007 में पुरुषोत्तम चौबे से रजिस्ट्री कराई गई है। सवाल है कि जब प्रॉपर्टी बैंक के पास गिरवी है तो कैसे परमीशन ली गई। पुलिस ने इससे जुड़े सारे दस्तावेज बरामद कर लिए हैं। बैंक ने भी इसकी पोल खोल दी।
कैबिनेट मंत्री का सलाहकार कर रहा पैरवी
मेनका सिनेमा की बिल्डिंग करोड़ों रुपये कीमत की है। पुलिस के मुताबिक इस संपत्ति में एक कैबिनेट मंत्री का भी नाम सामने आ रहा है। क्योंकि मंत्री का सलाहकार बार-बार पुलिस को फोन करके दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। चर्चा तो यह है कि इस संपत्ति के चक्कर में कई सत्ताधारी नेता भी लगे हैं। अलकरीम होटल के मालिक ने इस बिल्डिंग का ध्वस्तीकरण कराया है। पुलिस का कहना है कि ध्वस्तीकरण कैसे हुआ और इसमें कौन-कौन शामिल हैं, इसकी जांच चल रही है।
फिलहाल जांच जारी है
मेनका सिनेमा हॉल के मामले में बैंक ऑफ महाराष्ट्र नई दिल्ली की टीम आई थी। पुलिस ने सिनेमा हॉल पर पहले एमडीए की सील लगवा दी और फिर बैंक का नोटिस चस्पा कराया है। संबंधित विभागों के अलावा पुलिस भी जांच कर रही है। -राजेश कुमार पांडेय, एसएसपी