इकबाल के परिवार पर सीबीआई ने कसा शिकंजा
सहारनपुर। फर्जी कंपनियां बनाकर चीनी मिलें खरीदने के मामले में पूर्व बसपा एमएलसी मोहम्मद इकबाल के दो बेटों और साथियों पर सीबीआई ने शिकंजा कस दिया है। सीबीआई ने बृहस्पतिवार को इस मामले में लखनऊ में रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट दर्ज होने के साथ ही आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटक गई है। पूर्व एमएलसी खनन के कारोबार से जुड़े रहे हैं।
बसपा सरकार के दौरान राज्य चीनी निगम की बेची गई 21 चीनी मिलों की जांच सीबीआई और अन्य एजेंसियां कर रही है। इनमें सात बंद पड़ी है। नम्रता प्राइवेट लिमिटेड और गिरियाशो प्राइवेट लिमिटेड दो कंपनियां बनाई गई थीं, जिसके जरिये 2010-2011 में प्रदेश की कई चीनी मिलें खरीदी गई थीं। आरोप है कि यह दोनों शैल कंपनियां थी। इनमें पूर्व एमएलसी मोहम्मद इकबाल के बेटे वाजिद और जावेद के अलावा सहारनपुर के साउथ सिटी निवासी सौरभ मुकुंद, नौकर नसीम के अलावा सहयोगी राकेश शर्मा, धर्मेंद्र गुप्ता और सुमन शर्मा को डायरेक्टर बनाया गया था। 2017 में लखनऊ के गोमती नगर थाने में पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी, बाद में प्रदेश सरकार ने इसकी सीबीआई जांच कराने की संस्तुति की थी। बृहस्पतिवार को ही लखनऊ में सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और विवेचना भी सीबीआई करेगी। अब माना जा रहा है कि सीबीआई टीम मामले की जांच के लिए सहारनपुर आ सकती है। इसके अलावा आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास भी तेज होने की संभावना है।
एक साल पहले दर्ज मुकदमे में भी होगी कार्रवाई
सहारनपुर। गांव मीरपुर गंदेवड निवासी विश्वास कुमार ने मार्च 2018 में सहारनपुर के जनकपुरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें मोहम्मद इकबाल, सौरभ मुकुंद, विनोद, रविंद्र और बैंक शाखा प्रबंधक को आरोपी बनाया गया था। उसमें आरोप लगाया गया था कि कूट रचित हस्ताक्षर के जरिये धनराशि निकाली गई है। इस मामले को पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया, जिस कारण एक साल बाद तक भी इस मामले में आरोपियों के खिलाफ न तो चार्जशीट लगाई गई और न ही एफआर लगी। मुकदमे के वादी विश्वास कुमार का कहना है कि एक दिन पहले ही वह इस मामले को लेकर एसएसपी से भी मिलने गए थे। उनकी मांग है कि आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए और मुकदमे चार्जशीट लगाई जाए। एसएसपी ने उन्हें कार्रवाई का भरोसा दिया है।
अवैध खनन पर नहीं लगा विराम
सहारनपुर। अवैध खनन को लेकर सहारनपुर जनपद बदनाम रहा है। बेहट, नकुड़, गंगोह सहित जनपद के कई इलाकों में यमुना नदी से रेत खनन के अलावा खनिज सामग्री निकाली जाती है। पुलिस, प्रशासन और खान विभाग की शिथिलता का ही कारण है कि यहां पर अवैध खनन कभी पूरी तरह बंद नहीं हो सका। लचर व्यवस्था का फायदा खनन माफिया उठाते रहे हैं, जबकि कई बार अवैध खनन को लेकर टकराव भी होते आए हैं।