- हाईकोर्ट का नगर निगम प्रशासन को सख्त आदेश
- एक जुलाई को न्यायालय में दाखिल करना होगा शपथ पत्र
- एमडीए को विकसित करनी होगी शहर से बाहर कैटिल कालोनी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। हाईकोर्ट ने नगर निगम प्रशासन को 30 जून तक हर कीमत पर डेयरियों को शहर से बाहर करने का आदेश जारी कर दिया है। एक जुलाई को फिर से न्यायालय ने रिपोर्ट तलब की है।
शहर में दो हजार से अधिक डेयरियां हैं। शहर का कोई इलाका ऐसा नहीं है जहां पर घरों में पशुओं की डेयरियां न चल रही हों। डेयरियों से निकलने वाले गोबर को नाली और नालों में बहाया जाता है, जिसके कारण शहर के नाले और नालियां चोक हो गई हैं। सफाई व्यवस्था ध्वस्त होने से शहर में गंदगी पसरी है। बरसात के दिनों में तो नाले गोबर से चोक होने के कारण शहर जलभराव से जूझता है। लेकिन नगर निगम प्रशासन डेयरियों को शहर से बाहर करने में कामयाब नहीं हो पाया है।
निगम की एक नहीं चली
डेयरियों को शहर से बाहर भेजने के लिए नगर निगम और डेयरी संचालकों के बीच कई बार वार्ता हुईं। लेकिन डेयरी संचालकों के सामने नगर निगम की एक नहीं चली। जिसका परिणाम यह हुआ कि आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया। दाखिल पीआईएल पर हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई की गई। जिसमें न्यायालय ने नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान को 30 जून तक हर कीमत पर शहर से सभी डेयरियों को बाहर करने के आदेश दिए। साथ ही एक जुलाई को प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए हैं। अब देखना यह है कि क्या डेयरी संचालक हाईकोर्ट के आदेश पर अमल करेंगे या फिर निगम प्रशासन सख्ती के साथ डेयरी संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
एमडीए भूला कैटिल कॉलोनी
एमडीए प्रशासन कैटिल कॉलोनी को विकसित करना ही भूल गया है। हाईकोर्ट में बार-बार फटकार के बाद भी शहर से बाहर कैटिल कॉलोनी के लिए भूमि चिह्नित नहीं की गयी है। पिछले माह एमडीए ने किला रोड पर कैटिल कालोनी के लिए भूमि चिह्नित करने की बात कही थी। लेकिन उस पर भी अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है। एमडीए के अधिकारी कैटिल कालोनी पर चुप्पी साधे बैठे हैं। जबकि डेयरियों से निकलने वाले गोबर ने शहर की जनता को नारकीय जीवन जीने को मजबूर कर रखा है।