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होलसेल शॉपिंग मॉल पर कर चोरी के आरोप, हंगामा

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होलसेल शॉपिंग मॉल पर कर चोरी के आरोप, हंगामा
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मेरठ। एक होलसेल शॉपिंग मॉल द्वारा कर चोरी से बाजार में सामान की सप्लाई करने पर व्यापारियों ने जमकर हंगामा किया। डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के पदाधिकारी सामान से भरी गाड़ी को पकड़कर नवीन मंडी ले आए और जीएसटी विभाग की टीम को बुलाकर गाड़ी सहित सामान उनके सुपुर्द कर दिया। व्यापारियों ने जीएसटी कार्यालय पहुंचकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की।
मेरठ डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन की बृहस्पतिवार को बैठक हुई थी। इसमें कहा गया कि मेरठ स्थित होलसेल शॉपिंग मॉल एफडीआई के तहत लाइसेंस प्राप्त हैं, ये मॉल नियम विरुद्ध बाजार में सामान सप्लाई कर रहे हैं। व्यापारियों ने कहा कि नियमों के तहत होलसेल व्यापारी शॉपिग मॉल से खुद सामान खरीदेगा और अपने ही संसाधन से अपने गोदाम तक लेकर जाएगा, लेकिन होलसेल शॉपिंग माल द्वारा बाजार से आर्डर लेकर उनके यहां माल सप्लाई किया जा रहा है। इससे एक तरफ जहां डिस्ट्रीब्यूटरों का कारोबार चौपट हो रहा है, वहीं टैक्स की भी चोरी हो रही है। बैठक में तय हुआ कि इस प्रकार से सप्लाई होने वाले माल की धरपकड़ कर जीएसटी विभाग को सौंपा जाएगा।
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शुक्रवार को डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सामान से लदी चार गाड़ियाें का पकड़ लिया और हंगामा किया। इनमें कैश एंड कैरी बिजनेस करने वाली कंपनियों का कई लाख रुपये का माल जा रहा था। उन्होंने फोन कर वाणिज्य कर अधिकारियों को भी मौके पर बुला लिया। जांच में एक होलसेल शॉपिंग मॉल की गाड़ी के प्रपत्र सही न मिलने पर उसे कब्जे में ले लिया, जबकि बाकी गाड़ियों के कागज सही होने पर उन्हें छोड़ दिया। वहीं इस संबंध में जीएसटी के ज्वाइंट कमिश्नर ओपी वर्मा ने कहा कि मामले में जांच चल रही है, यदि कोई अनियमितता हुई है तो कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के संरक्षक अतुल गर्ग, अध्यक्ष विनेश जैन, महामंत्री मनुज अग्रवाल, मुदित मांगलिक, पारुल रस्तोगी और मनोज अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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नवीन गुप्ता ने की कार्रवाई की मांग
संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता भी मौके पर पहुंचे और जीएसटी अधिकारियों से कहा कि इस तरह से नियम विरुद्ध माल की सप्लाई से जहां डिस्ट्रीब्यूटर अपना कारोबार बंद करने के कगार पर पहुंच गए हैं, वहीं इससे टैक्स की भी चोरी हो रही है। ऐसे में कार्रवाई की जाए। नवीन गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जिस जगह से माल भेजा गया है वहां से 27 मार्च का बिल कटा है, जबकि ई वे बिल नहीं था। जैसे ही जीएसटी विभाग को सूचना दी गई तो कंपनी ने आनन फानन ने 29 मार्च का ई वे बिल अपलोड करा दिया। इस मामले में जीएसटी विभाग को गहनता से जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए।
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