अमर उजाला ब्यूरो
हस्तिनापुर। विश्व की सुख, शांति और समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के आज अठारहवें दिन बुधवार को महाराज श्री भावभूषण ने कहा कि स्वाभाविक चरित्र मन को पवित्र करता है। अशुभ कार्य को छोड़कर शुभ कार्य को करने का भाव ही मन की पवित्रता को दर्शाता है।
सर्वप्रथम विधानाचार्य सुदीप शास्त्री एवं अंकित शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ हुआ। आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य कंवर लाल जैन, स्वर्ण कलश से अभिषेक का अशोक, शांतिधारा करने का अशोक, विमल जैन, त्रिलोक जैन को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्ज्वलन सुशीला पाटनी ने किया। सुनीता दीदी ने संसार के सभी जीव सुखी रहें ऐसी मंगल भावना के साथ शांतिधारा का उच्चारण किया। तदोपरांत देव-शास्त्र-गुरु की पूजन आदिनाथ भगवान की पूजन की। इसके बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। जिसमें विधान कराने वाले सभी धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए। आज 131 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया। जिसमें मुख्य रूप से सुशीला पाटनी, रूप जैन, कमलेश जैन, विपिन, गीता, राजेन्द्र जैन, नमन, युक्ति, अलीशा जैन आदि शामिल हुए। भक्तामर पाठ का शुभारंभ अंकित शास्त्री ने संस्कृत भाषा में किया। इसी बीच अनेक प्रांतों से पधारे यात्री भाई एवं जयमाला जैन, रेणू जैन, रजनीश चंद, महक, निधि जैन, राकेश जैन, लता, प्रवीण जैन, इंदू, सुशील जैन, निर्मल जैन, मुनीश, मेघा आदि ने पाठ का वाचन किया। आज विधान के मध्य विनोद एंड म्यूजिक पार्टी की मधुर लह पर जैन समाज ने भजन प्रस्तुत किया। भगवान पुष्पदंत जी का गर्भ कल्याण धूमधाम से मनाया गया। परम पूज्य गुरुवर ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि स्वाभाविक चरित्र मन को पवित्र करता है। अशुभ कार्य को छोड़कर शुभ कार्य को करने का भाव ही मन की पवित्रता को दर्शाता है। प्राकृतिक रूप से कोई बुरा कार्य करने के विचार मात्र से ही मन में भय पैदा होगा, धड़कन तेज हो जाती है। फिर भी व्यक्ति ऐसे कर्म करता है तो एक झटका ही उसे संभालने में कारण बनता है। 48 दीपकों द्वारा मंगल आराधना की गई। आज के विधान का विसर्जन विनोद जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीपक प्रज्ज्वलन विमल जैन, आदिनाथ भगवान का मुकेश जैन, चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन त्रिलोक जैन ने किया। प्रश्न मंच के पश्चात उपस्थित विजेताओं को विपिन जैन एवं विमल जैन की ओर से पुरस्कार प्रदान किए गए। यहां मुकेश जैन, मनोज जैन, राजीव, सुभाष, प्रेम, अशोक, अतुल, मणीचन्द जैन आदि का विशेष सहयोग।
मुख्य बातें
भक्तामर विधान एवं पाठ के आज अठारहवें दिन 48 अर्घ्य चढ़ाए